भारत और जर्मनी के बीच सैन्य क्षेत्र में यह रिश्ता ऐसे समय पर बढ़ रहा है जब एक समय में जर्मनी की सरकार ने भारत के पुलिसकर्मियों के लिए MP5 सबमशीनगन देने से मना कर दिया था। जर्मनी की पूर्व चांसलर एंजेला मर्केल की सरकार ने भारत को छोटे हथियारों की सप्लाई पर यह रोक लगाई थी। इसके बाद जब नई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार आई है, तब से यह प्रतिबंध हटा लिया गया। यही नहीं एनएसजी को इस सब मशीनगन की सप्लाई भी की गई है। एंजेला मर्केल सरकार का दावा था कि भारतीय पुलिस का मानवाधिकार रेकॉर्ड ‘खराब’ है।
भारत और जर्मनी में मजबूत होंगे रक्षा संबंध
चांसलर मर्ज भी एंजेला मर्केल की पार्टी के हैं लेकिन वह भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं। खासकर तब जब अमेरिका की नीतियों से पूरी दुनिया सहमी हुई है। पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘वे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त अभ्यास करेंगे और वरिष्ठ अधिकारियों का आदान प्रदान करेंगे।’ उन्होंने जर्मनी और भारत की नौसेनाओं के बीच पोर्ट कॉल होता रहता है। इस बयान में कहा गया है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देशों के बीच खास प्रगति हुई है।
बयान के मुताबिक, ‘दोनों नेताओं ने सबमरीन, हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा के लिए तकनीक और ड्रोन के खिलाफ तकनीक में सहयोग जारी रखने पर खुशी जताई है।’ भारत और जर्मनी के बीच कुशल वर्कर और निवेश को लेकर भी बात हुई है। विश्लेषकों का कहना है कि जर्मनी के साथ रिश्ते बढ़ाकर भारत अपने सप्लायरों की संख्या को बढ़ाना चाहता है ताकि रणनीतिक स्वायत्ता बनी रहे। जर्मनी भारत को बिना किसी गठबंधन में शामिल हुए ही अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक मुहैया कराता है। इससे वह एक भरोसेमंद पार्टनर बनकर उभर रहा है। भारत अब तक रूस, इजरायल और फ्रांस पर हथियारों और अत्याधुनिक तकनीक के लिए ज्यादा निर्भर था।
जर्मनी भारत को देगा AIP से लैस सबमरीन
भारत और जर्मनी के बीच 8 अरब डॉलर की जर्मन पनडुब्बी डील को लेकर बातचीत चल रही है। इसके तहत जर्मनी भारत को टाइप-214 एनजी सबमरीन मुहैया कराएगा। भारत के दोनों पड़ोसी दुश्मन देश चीन और पाकिस्तान दोनों ही AIP से लैस किलर सबमरीन को अपने बेड़े में शामिल कर रहे हैं। ये ज्यादा देर तक अब समुद्र में डूबी रह सकती हैं। ऐसे में भारत के लिए खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है। जर्मनी के साथ बातचीत चल रही है जिससे इन पनडुब्बी को भारत में ही बनाया जाएगा जिससे तकनीक भी आएगी। इसके आने से भारत की हिंद महासागर में ताकत बढ़ जाएगी। ये पनडुब्बी एआईपी से लैस होंगी जिससे वे लंबे समय तक पानी में रह सकेंगी। भारत प्रोजेक्ट 75I के तहत 6 सबमरीन लेगा।












