होली को लेकर गूगल पर सबसे ज्यादा ये सर्च किया गया
- इंडिया समडे पर छपी एक स्टडी के अनुसार, 2024 में वर्ल्ड मोस्ट होली ऑबसेस्ड कंट्रीज के आंकड़े आए थे, जिसके अनुसार होली को लेकर गूगल पर सबसे ज्यादा होली फेस्टिवल, होली सेलिब्रेशन और होली डेट नाम से खूब सर्च किया गया।
- इसके बाद हर एक लाख निवासियों के हिसाब से आंकड़ों का आकलन किया गया, जिसमें पता चला कि होली को लेकर पूरी दुनिया में दीवानगी जबरदस्त है।
होली के प्रति दीवानगी में सबसे आगे हैं कतर-सिंगापुर
स्टडी के अनुसार, होली के प्रति दीवानगी के मामले में नंबर वन पर खाड़ी का देश कतर, दूसरे नंबर पर सिंगापुर, तीसरे नंबर पर मॉरीशस, चौथे पर संयुक्त अरब अमीरात, पांचवें पर न्यूजीलैंड, छठें पर बहरीन, सातवें पर ब्रिटेन, आठवें पर भारत, नवें पर जर्मनी और 10वें पर स्विट्जरलैंड रहे हैं।
भारत तो होली का जन्मस्थान
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत होली का जन्मस्थान है। यहां होलिका दहन और उसके बाद रंग खेलना होली है। भारत में होली एक आध्यात्मिक-सांस्कृतिक यात्रा है, जो भक्त प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की कथा से जुड़ी है।
नेपाल में हफ्ते भर तक होली ही होेली
नेपाल में होली को फागू पूर्णिमा कहा जाता है। यह एक मुख्य त्योहार से एक हफ्ते पहले ही शुरू हो जाता है। पहाड़ी और तराई इलाकों में इसे मनाने को लेकर कुछ अंतर मिलता है।
मॉरीशस और फिजी भी होली के दीवाने
मॉरीशस में भी होली दो दिन मनाई जाती है। फिजी में बेहद धूमधाम से होली मनाई जाती है। यह द्वीपीय देश दो दिनों तक होली के खुमार में डूबा रहता है।
अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया में भी जमकर खेलते है होली
अमेरिका-यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी जमकर होली खेली जाती है। वहां रहने वाला भारतीय समुदाय इसे अपनी भारतीय संस्कृति से जोड़कर मनाता है। दक्षिण अफ्रीका और खाड़ी के बाकी देशों में भी भारतीय समुदाय के लोग होली का जश्न मनाते हैं।
ईरान का तिरगान क्या होली जैसा है
- ईरान का तिरगान और भारतीय होली में मुख्य समानता यह है कि दोनों ही दो अलग-अलग गैर अब्राहमिक त्योहारों के उदाहरण हैं, जो दो अलग-अलग सभ्यताओं द्वारा मनाए जाते थे। हालांकि, इनकी कुछ साझा प्रागैतिहासिक जड़ें भारत-ईरानी संस्कृति से जुड़ी थीं।
- तिरगान त्योहार से मुख्य रूप से जुड़े देवता तिश्त्र्या हैं, जो बारिश और फसल के ईरानी खगोलीय देवता हैं, जिन्हें बाद में तिश्तर और कभी-कभी तिर भी कहा जाता था। तिरगान दो प्रसिद्ध ईरानी मिथकों से भी जुड़े हैं।
- तिरगान के दौरान पारसी धार्मिक समारोहों में पवित्र एफेड्रा पौधे के रस को पानी, दूध और अनार के रस के साथ मिलाकर तैयार किए गए पवित्र होमा अमृत का अर्पण शामिल है। इस दौरान लोग एक-दूसरे पर पानी फेंकते हैं, जिसमें समय के साथ अब कुछ जगहों पर रंगों का भी इस्तेमाल होने लगा है।














