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  • भारत में हर वर्ग को मिल रहा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा

    लेखक: कविता भाटिया भारत में अगले महीने इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट होने वाला है। इसमें दुनिया भर के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के दिग्गज जुटेंगे। यहां चर्चा AI के मशीनों, एल्गोरिदम या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सभी के लिए उपयोगी और आसान बनाने पर की जाएगी। चर्चा में महिलाओं, युवाओं और कामगारों पर भी


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    By Azad Hind Desk जनवरी 22, 2026
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    लेखक: कविता भाटिया
    भारत में अगले महीने इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट होने वाला है। इसमें दुनिया भर के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) के दिग्गज जुटेंगे। यहां चर्चा AI के मशीनों, एल्गोरिदम या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे सभी के लिए उपयोगी और आसान बनाने पर की जाएगी। चर्चा में महिलाओं, युवाओं और कामगारों पर भी जोर रहेगा।

    इंडिया AI मिशन: AI की ताकत इंसानों को रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाना है। AI के जरिये महिलाओं को आत्मनिर्भर, युवाओं को हुनरमंद बनाना है। यह असंगठित क्षेत्रों के काम करने वालों के लिए सुरक्षा और अवसर दे सकता है। केंद्र सरकार ने मार्च 2024 में इंडिया AI मिशन को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत में AI को विकसित करना है। इसके तहत कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने, नए इनोवेशन सेंटर खोलने, भरोसेमंद डेटा प्लैटफॉर्म तैयार करने, AI आधारित ऐप्लिकेशन बनाने, युवाओं को कौशल सिखाने और स्टार्टअप को आर्थिक मदद जैसे कदम उठाए गए। नतीजा रहा कि अब शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक और लैब से लेकर खेतों तक AI है।

    विकास पर ध्यान: इंडिया AI इनोवेशन सेंटर के जरिये समावेशी विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे AI बनाए जा रहे हैं, जो देश की भाषायी और सामाजिक विविधता को समझें। इन्हें महिलाओं, किसानों, गिग वर्कर्स और छोटे व्यापारियों की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है।

    अलग भूमिका: भले ही दुनिया में AI का उपयोग उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए हो रहा है। मगर, भारत में इसका असर रोजगार, सुरक्षा, ट्रेनिंग और अवसर के तौर पर है। आज भारत की गिग अर्थव्यवस्था में AI की मदद से महिलाएं अपनी पहचान गढ़ रही हैं। कई महिला उद्यमी AI वाले ऑनलाइन बाजार से जुड़कर कारोबार बढ़ा रही हैं। महिला ड्राइवर, डिलिवरी पार्टनर सभी AI से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

    आत्मनिर्भर महिलाएं: कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में भी AI डिजिटल समावेशन को रफ्तार दे रहा है। क्षेत्रीय भाषाओं वाले AI असिस्टेंट कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। लेनदेन की जानकारी देने वाले स्पीकर से महिलाएं अपने पैसों का हिसाब-किताब रख पा रही हैं। युवाओं के लिए AI महज प्रौद्योगिकी नहीं, बल्कि भविष्य का रास्ता है। सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से AI कुशल प्रतिभाओं की नई पीढ़ी तैयार हो रही है। डिजिटल साक्षरता से लेकर अडवांस मशीन लर्निंग (AML) के प्रशिक्षण पर जोर है। युवा AI फॉर ऑल का मकसद युवाओं को AI की बुनियादी जानकारी देना है।

    खेती में AI: कई स्टार्टअप रिहायशी इलाकों और कार्यस्थलों पर महिला सुरक्षा मजबूत करने के वास्ते AI सिस्टम का उपयोग कर रही हैं। आपातकालीन सेवाओं में भी AI वाली शिकायत निवारण प्रणाली शामिल की गई है। खेती में भी AI मददगार है। इससे किसानों को कीटों के हमले और मौसम संबंधी जोखिमों का पूर्वानुमान पता चल रहा है। AI के जरिये फिनटेक कंपनियां उन महिला उद्यमियों को लोन दे रही हैं, जो बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थीं।

    सभी हो रहे सशक्त: नीति आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि AI कैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाकर देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों को सशक्त बना सकता है। AI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही उसका नैतिक और निष्पक्ष उपयोग सुनिश्चित करना भी जरूरी है। भारत में AI क्रांति अवसर देने के लिए होनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था हो कि गांव की महिला उद्यमी, दूर-दराज के युवाओं और स्टार्टअप संस्थापकों को AI का बराबर फायदा मिले। भारत में AI की सफलता उसके जटिल एल्गोरिदम से नहीं, बल्कि उसके अवसर देने से मापी जाएगी।
    (लेखिका इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया AI मिशन की COO हैं)

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