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  • मिडिल ईस्ट से भारत की ओर मुड़ने लगे टैंकर, रूसी तेल पर अमेरिकी बैन के बाद पुराने दोस्त याद आए

    नई दिल्ली: भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना कम कर दिया है और मध्य पूर्व (मिडिल) से अपनी तेल की खरीद बढ़ा दी है। हालांकि रूस अभी भी भारत को तेल बेच रहा है, लेकिन उसकी मात्रा कम हो गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत को रूसी तेल खरीदने में कुछ जोखिमों का


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    By Azad Hind Desk जनवरी 25, 2026
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    नई दिल्ली: भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना कम कर दिया है और मध्य पूर्व (मिडिल) से अपनी तेल की खरीद बढ़ा दी है। हालांकि रूस अभी भी भारत को तेल बेच रहा है, लेकिन उसकी मात्रा कम हो गई है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत को रूसी तेल खरीदने में कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।

    जनवरी 2026 के पहले तीन हफ्तों के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने रूस से करीब 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कच्चा तेल खरीदा। यह दिसंबर के औसत 1.21 मिलियन bpd से कम है और 2025 के मध्य में 2 मिलियन bpd से भी काफी कम है।
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    रूस से नियमानुसार तेल का आयात

    Kpler के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने पीटीआई को बताया कि जनवरी 2026 में भारत की कच्चा तेल खरीद कम जोखिम और अधिक भरोसेमंद आपूर्ति की ओर एक स्पष्ट बदलाव दिखाती है। मध्य पूर्व से तेल की आमद बढ़ रही है, जबकि रूसी कच्चे तेल का प्रवाह अभी भी मौजूद है, लेकिन यह अधिक चुनिंदा और नियमों के अनुसार हो रहा है।

    पुराने साथियों पर भरोसा

    • भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। अब वह एक बार फिर अपने पारंपरिक मध्य पूर्वी आपूर्तिकर्ताओं पर अधिक भरोसा कर रहा है।
    • इराक अब रूस के लगभग बराबर मात्रा में तेल की आपूर्ति कर रहा है। दिसंबर 2025 में इराक से औसत खरीद 9,04,000 bpd थी।
    • सऊदी अरब से भारत को होने वाली निर्यात भी इस महीने बढ़कर 9,24,000 bpd हो गई है। अप्रैल 2025 में यह मात्रा 5,39,000 bpd थी और दिसंबर 2025 में 7,10,000 bpd थी।

    रिफाइनरियों से बढ़ाई खरीद

    रिफाइनरियां सुचारू डिलीवरी और कम परिचालन समस्याओं को सुनिश्चित करने के लिए मध्य पूर्व से अपनी खरीद बढ़ा रही हैं। इससे आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों को कम करके रिफाइनरियों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

    साल 2022 में,रूस भारत का शीर्ष कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा था। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रियायती रूसी तेल की बड़ी मात्रा में खरीद शुरू कर दी थी। इस दौरान, रूसी कच्चे तेल का आयात भारत के कुल आयात का 1% से भी कम से बढ़कर अपने चरम पर लगभग 40% तक पहुंच गया था।

    अमेरिकी बैन से आई गिरावट

    हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों ने रूसी आपूर्तिकर्ताओं पर खरीद धीमी कर दी है, क्योंकि अनुपालन जोखिम बढ़ गए हैं। 21 नवंबर को Rosneft, Lukoil और उनकी अधिकांश स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) जैसी रिफाइनरियों ने अस्थायी रूप से रूसी कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था।

    क्या रूस से जारी रहेगा तेल?

    इस मंदी के बावजूद रूसी कच्चा तेल भारत के आयात मिश्रण का हिस्सा बना रहेगा। रितोलिया का कहना है कि यह गिरावट रूसी तेल से पूरी तरह दूर जाने के बजाय अल्पकालिक अनुपालन मुद्दों को दर्शाती है।

    रितोलिया ने कहा कि भारत संभवतः साल 2026 की शुरुआत में रूसी कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा, लेकिन 2023-2025 के रिकॉर्ड उच्च स्तर की तुलना में थोड़ी कम मात्रा में। रूसी कच्चा तेल किफायती है और रिफाइनरी मार्जिन को बढ़ावा देता रहता है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी तेल खरीद रहे हैं। ऐसे संकेत हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज भी ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से खरीद फिर से शुरू कर सकती है।

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