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  • यमन में ‘राज’ करने की UAE की 10 साल पुरानी चाल फेल, सऊदी प्रिंस ने 48 घंटों में कुचला सपना, अरबों बर्बाद

    सना: यमन में अरब दुनिया की दो शक्तियों के बीच तनाव अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सऊदी अरब के सामने स्पष्ट तौर पर पिछड़ गया है। खासतौर से बीते वीकेंड में सऊदी अरब ने दक्षिणी यमन में अपनी ताकत को मजबूत किया और यूएई सैनिकों ने क्षेत्र छोड़ दिया।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 13, 2026
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    सना: यमन में अरब दुनिया की दो शक्तियों के बीच तनाव अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सऊदी अरब के सामने स्पष्ट तौर पर पिछड़ गया है। खासतौर से बीते वीकेंड में सऊदी अरब ने दक्षिणी यमन में अपनी ताकत को मजबूत किया और यूएई सैनिकों ने क्षेत्र छोड़ दिया। सऊदी समर्थित सेनाओं ने यूएई से सपोर्ट पाने वाले गुट से ज्यादातर इलाके छीन लिए हैं। यह यमन में यूएई के एक दशक पुराने प्रोजेक्ट का खत्म होना है। यह यूएई के लिए झटका है तो दूसरी ओर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए कामयाबी है।

    सऊदी अरब और UAE ने 2015 में एक गठबंधन बनाया था ताकि हूतियों से लड़ सकें। हूतियों ने तब यमन की राजधानी सना और उत्तर के ज्यादातर हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। UAE ने पिछले दस साल दक्षिणी यमन, लाल सागर तट और तैज शहर में मिलिशिया का नेटवर्क बनाने और उसे फंड देने में बिताए। हालिया दिनों में उसका प्रभाव तेजी से बढ़ा लेकिन अब तेजी से खत्म भी हो गया है।

    सऊदी में STC नेता

    यमन में कई साल साथ मिलकर हूतियों से लड़े सऊदी और यूएई समर्थित गुटों के बीच मतभेद कुछ समय में बढ़ने लगे थे और पिछले महीने चरम पर पहुंच गए। बीत महीने यूएई समर्थित STC (सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल) ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई हिस्सों पर कब्जा किया। इससे सऊदी अरब भड़क गया और सैन्य कार्रवाई तेज कर दी। सऊदी समर्थित सेनाओं ने STC पर हमले करते हुए उससे ज्यादातर इलाके वापस ले लिए।

    ड्रॉप साइट न्यूज के मुताबिक सऊदी अरब में STC नेता हैं। अब यह समूह अब बंटा हुआ दिख रहा है और इसका बड़ा गुट स्पष्ट रूप से सऊदी अरब के नियंत्रण में है। गुट के नेता अल-जुबैदी का एक वांछित भगोड़े की तरह यूएई भागने और STC में बंटवारे की एक महीने पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। एक महीने पहले तक यह गुट यूएई के इशारे पर हमले करते हुए इलाकों पर नियंत्रण ले रहा था।

    यूएई को सऊदी का अल्टीमेटम

    बीते साल दिसंबर की शुरुआत में UAE समर्थित STC बलों ने यमन के सबसे बड़े प्रांत हद्रामौत पर कब्जा कर लिया था, जिसकी सऊदी अरब के साथ 400 मील लंबी सीमा है। गुट ने अल-महरा प्रांत पर भी कब्जा किया जो ओमान की पश्चिमी सीमा के साथ फैला हुआ है। STC के इस कदम से UAE और सऊदी अरब के बीच तनातनी बढ़ी।

    यूएई और सऊदी में और ज्यादा तनाव 30 दिसंबर को बढ़ा, जब सऊदी अरब ने मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमले किए। इसमें यमनी डॉक पर उतारे जा रहे अमीराती सैन्य उपकरणों की खेप को निशाना बनाया गया। इसके बाद सऊदी अरब ने एक अल्टीमेटम के तहत UAE को 24 घंटे के भीतर यमन से निकलने और यमन के भीतर किसी भी पक्ष को सैन्य या वित्तीय सहायता बंद करने के लिए कहा।

    यूएई की वापसी

    सऊदी की धमकी के बाद यमन में अमीराती सैनिक यमन के दक्षिणी तट पर और शबवा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस टर्मिनल को छोड़ गए। UAE के सैन्य कार्गो विमान अपने सैनिकों को वापस ले गए। इस तरह से यमन में यूएई का दशकों पुराना प्रोजेक्ट आधिकारिक तौर पर 48 घंटों में समाप्त हो गया और क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का सपना टूट गया।

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