जर्मन चांसलर ने कहा कि अगर यूरोप के किसी क्षेत्र पर टैरिफ या किसी भी तरीके से कोई हमला होता है तो यूरोपीय देश इसका जटकर मुकाबला करेंगे और मजबूती के साथ जवाब देंगे। उन्होंने कहा, ‘हमें यूरोप में आजादी से अपनी रक्षा करने में सक्षम बनना होगा। हम उन निर्भरताओं को कम करना होगा, जो अभी हमें कमजोर बनाती हैं।’
टैरिफ की धमकियां ठीक नहीं
मर्ज ने डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोप को दी जा रही टैरिफ की धमकियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नए टैरिफ लगाने से अमेरिका और यूरोप के बीच के रिश्ते कमजोर होंगे। इस तरह का कदम दोनों के बीच के पुराने और मजबूत संबंधों को नुकसान पहुंचाएगा। ऐसे में ट्रंप को इस तरह के रुख से बचना चाहिए।
दावोस में कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी कड़ा रुख दिखाया है। कार्नी ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था टूट रही है। अमेरिका ने दशकों से वैश्विक राजनीति को संभाला है लेकिन अब यह बदलाव से आगे बढ़ते हुए टूट की तरफ रही है। ऐसे में अब भारत और चीन जैसे देशों को सामने आना होगा।
ग्रीनलैंड पर क्या है विवाद
ग्रीनलैंड करीब 57,000 की आबादी वाला द्वीप है। ग्रीनलैंड को ज्यादातर मामलों में स्व-शासन हासिल है। देश का अपना पीएम बनता है लेकिन रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क के हाथों में है। यह इलाका आर्कटिक और अटलांटिक महासागर के बीच में है। यह कनाडा के उत्तरपूर्व और आइसलैंड के उत्तरपश्चिम में आता है। इससे यह रणनीतिक तौर पर अहम हो जाता है।
डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के लोग लगातार यह कह रहे हैं कि हम ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहते हैं। ग्रीनलैंड पर कब्जे के अमेरिका के इरादे ने ना सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क बल्कि पूरे यूरोप में गुस्सा है। डेनमार्क, ग्रीनलैंड और यूरोप के नेता लगातार ये कह रहे हैं कि इस तरह से किसी क्षेत्र पर हमले की कोशिश पूरे वर्ल्ड ऑर्डर को पटरी से उतार सकती है।














