राफेल
भारतीय वायुसेना ने पहले ही सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत बड़ी संख्या में राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। इस डील में खास बात यह है कि इन विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। हालांकि, खरीदे जाने वाले विमानों की अंतिम संख्या पर अभी बातचीत चल रही है, लेकिन भारतीय वायु सेना को कम से कम 114 आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद से लेनी होगी मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, राफेल विमानों की इस खरीद के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद कीमतों पर बातचीत होगी और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी मिलेगी। इसके साथ ही साथ ही, वार्षिक बजट में पर्याप्त प्रावधान भी करना होगा।
अरबों यूरो में हो सकती है डील
पिछले साल, भारत ने विमानों के नौसेना के लिए 24 विमानों के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। जिससे अब वायुसेना के लिए होने वाली इस बड़ी डील के लिए एक तय कीमत पहले से मौजूद है, जो 10 अरब यूरो में हो सकती है।
TASL ने डसॉल्ट एविएशन के साथ किया समझौता
राफेल विमानों का भारत में निर्माण होने से देश के औद्योगिक क्षेत्र को महत्वपूर्ण तकनीकें मिलेंगी। पिछले साल जून में, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन के साथ भारत में राफेल लड़ाकू विमानों के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य ढांचा) बनाने के लिए समझौते किए थे।
वहीं TASL हैदराबाद में एक विशेष निर्माण सुविधा स्थापित कर रही है। यहां भारतीय जरूरतों के साथ-साथ डसॉल्ट को मिलने वाले वैश्विक ऑर्डरों के लिए फ्यूजलेज के चार मुख्य हिस्से बनाए जाएंगे। इस सुविधा से वित्तीय वर्ष 2028 तक पहले विमानों का निर्माण शुरू होने की उम्मीद है और यह सालाना 24 फ्यूजलेज बनाने की क्षमता रखेगी।
सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में इंजन निर्माण संयंत्र और उत्तर प्रदेश के जेवर में मेंटेनेंस, रिपेयर्स और ओवरहॉल (MRO) हब जैसी मौजूदा परियोजनाओं से राफेल के निर्माण का 60% मूल्य भारत में आ सकता है।














