राफेल का सोर्स कोड न मिलने से क्या नुकसान होगा?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोर्स कोड पर रोक से भारत फ्रांस की मंजूरी और मदद के बिना कुछ सेंसर और हथियारों को खुद से जोड़ने या राफेल के सॉफ्टवेयर को कस्टमाइज करने की काबिलियत खो देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस इन सोर्स कोड को दशकों में डेवलप किए गए प्रोप्राइटरी प्रोडक्ट के तौर पर देखता है, जिन्हें किसी दूसरे देश के साथ शेयर नहीं किया जा सकता।
राफेल के सोर्स कोड की जगह क्या देगा फ्रांस
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ्रांस राफेल के सोर्स कोड की जगह पर एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) दे सकता है। इससे भारत बिना अंदर के प्रोप्राइटरी लॉजिक को देखे अपने सिस्टम को इंटीग्रेट कर सकेगा। फ्रांस, भारत के अलावा यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) को एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस का ऑफर दे चुका है। राफेल F4 स्टैंडर्ड के पहले अंतरराष्ट्रीय ग्राहक के तौर पर, UAE ने API का इस्तेमाल करके अपने स्वदेशी गाइडेड हथियारों को इंटीग्रेट करने के लिए एक एग्रीमेंट किया था।
भारत के पास कौन से स्टैंडर्ड के राफेल विमान
भारत वर्तमान में F3-R स्टैंडर्ड राफेल जेट ऑपरेट करता है।इनमें 13 इंडिया-स्पेसिफिक एनहांसमेंट हैं। हालांकि, फ्रांस से होने वाली नई डील में 114 एयरक्राफ्ट F4 स्टैंडर्ड के होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, 114 लड़ाकू विमानों में से, भारत आखिरी 24 को नेक्स्ट-जेनरेशन F5 स्टैंडर्ड का बनाने के ऑप्शन पर बातचीत कर रहा है।













