• International
  • रूस के साथ ‘टैंक वाली दोस्ती’: भारत में बनेगा घातक T-90 टैंक का नया वेरिएंट! ताकत जानें

    मॉस्को: भारत और रूस अपनी टैंक वाली दोस्ती को और ज्यादा मजबूत करने जा रहे हैं। दरअसल, रूस ने भारत को T-90 भीष्म टैंक के नए वेरिएंट का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने पर हामी भरी है। इस नए टैंक का नाम T-90MS है। T-90MS टैंक का प्रोडक्शन पहले से ही भारत


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 18, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    मॉस्को: भारत और रूस अपनी टैंक वाली दोस्ती को और ज्यादा मजबूत करने जा रहे हैं। दरअसल, रूस ने भारत को T-90 भीष्म टैंक के नए वेरिएंट का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने पर हामी भरी है। इस नए टैंक का नाम T-90MS है। T-90MS टैंक का प्रोडक्शन पहले से ही भारत में मौजूद T-90 वेरिएंट बना रही मौजूदा फैसिलिटी में होगा। इससे भारत की मैन्यूफैक्चरिंग लागत में भारी कमी आएगी और बचे हुए पैसों का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया जाएगा।

    T-90MS टैंक के निर्माण में मदद को रूस तैयार

    डिफेंस मिरर के मुताबिक, 17 फरवरी को रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कहा कि वह पहले से ही T-90 वेरिएंट बना रही मौजूदा फैसिलिटी में T-90MS का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। 2019 में, भारत ने “मेक इन इंडिया” इनिशिएटिव के तहत 464 T-90MS टैंकों के लाइसेंस-प्रोडक्शन के लिए 2.8 बिलियन डॉलर का एग्रीमेंट किया था।

    T-90MS टैंक की खासियतें जानें

    T-90MS टैंक में 125 मिमी की स्मूथबोर गन लगी है, जो पांच किलोमीटर तक गाइडेड मिसाइल दाग सकती है। इसे एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और कलिना फायर-कंट्रोल सिस्टम का सपोर्ट मिला है। T-90MS टैंक में 1,130-हॉर्सपावर का V-92S2F डीजल इंजन लगा है। इस टैंक की अनुमानित रेंज 550 किलोमीटर है और टॉप स्पीड 60 से 72 किमी/प्रति घंटा के बीच है। T-90MS टैंक को तीन लोगों का क्रू ऑपरेट करता है। इसमें एक ऑटोमेटेड लोडर लगा हुआ है।

    T-90MS टैंक पहले से ज्यादा सुरक्षित

    T-90MS टैंकों में ब्लोआउट पैनल के साथ रीडिजाइन किया गया एम्युनिशन स्टोरेज लगा हुआ है, जो टैंक की सुरक्षा को बढ़ाता है। यह टैंक मौजूदा टी-90 भीष्म की जगह ले सकता है, जो भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक है। भारत ने टी-90 भीष्म को 2020 में चीन के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद लद्दाख के अग्रिम इलाकों में तैनात किया था। टी-90 भीष्म को भारतीय सेना का रीढ़ माना जाता है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।