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  • लश्कर-ए-तैयबा भर्ती मामला: एनआईए कोर्ट से सैयद एम इदरीस को 10 साल की सजा,

    नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने पाकिस्तान से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा भर्ती और कट्टरपंथीकरण मामले में एक आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं की भर्ती कर उन्हें प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने और भारत सरकार के खिलाफ जिहाद के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 22, 2026
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    नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने पाकिस्तान से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा भर्ती और कट्टरपंथीकरण मामले में एक आरोपी को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं की भर्ती कर उन्हें प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ने और भारत सरकार के खिलाफ जिहाद के लिए उकसाने से जुड़ा है।

    आरोपी को मिली इतनी सजा

    एनआईए की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, कोलकाता स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने बुधवार को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले सैयद एम इदरीस को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषसिद्धि करते हुए अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा एक साथ चलने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही आरोपी पर 70 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

    2020 का है मामला

    प्रेस नोट में बताया गया कि एनआईए ने यह मामला अप्रैल 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस से अपने हाथ में लिया था। जांच के दौरान एजेंसी ने सैयद एम इदरीस को जम्मू-कश्मीर के अल्ताफ अहमद राथर के साथ गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर तानिया परवीन के साथ साजिश रची थी, जिसका मकसद स्थानीय लोगों की भर्ती कर लश्कर-ए-तैयबा का एक मॉड्यूल खड़ा करना था।

    आरोपी के पास से बरामद हुई ये चीजें

    तानिया परवीन को इससे पहले मार्च 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने उत्तर 24 परगना के बदुरिया इलाके में एक तलाशी अभियान के दौरान गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई पुख्ता खुफिया सूचना के आधार पर की गई थी। तलाशी के दौरान एसटीएफ को जिहादी पाठ्यपुस्तकों सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी।

    जांच में खुलासा

    एनआईए की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बनाया जा रहा था और उन्हें भारत सरकार के खिलाफ जिहाद करने के लिए उकसाया जा रहा था। इस नेटवर्क का संबंध पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जोड़ा गया।

    दोनों आरोपी के खिलाफ जारी हुए नोटिस

    इसके बाद, सितंबर 2020 और मई 2021 में एनआईए ने इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित दो फरार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। फरार आरोपियों की पहचान आयशा उर्फ आयशा बुरहान उर्फ आयशा सिद्दीकी उर्फ सैयद आयशा और बिलाल उर्फ बिलाल दुरानी के रूप में हुई है। इन दोनों के खिलाफ रेड कॉर्नर और ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

    मामलों में जारी रहेगी कठोर कार्रवाई

    एनआईए ने बताया कि इस केस में अन्य दो गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि वह आतंकी संगठनों से जुड़े नेटवर्क, भर्ती और कट्टरपंथीकरण की गतिविधियों पर सख्त नजर बनाए हुए है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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