दक्षिण अफ्रीका और अब न्यूजीलैंड से मिली हार
सबसे ताजा उदाहरण हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे वनडे और न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में देखने को मिला। विराट कोहली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ शानदार 102 रनों की शतकीय पारी खेली, जिसकी बदौलत भारत ने 359 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इतने बड़े स्कोर के बावजूद, भारतीय गेंदबाज इस लक्ष्य का बचाव करने में नाकाम रहे और दक्षिण अफ्रीका ने 4 विकेट से जीत दर्ज की। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया 338 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी, वहीं विराट कोहली 124 रन बनाकर खेल रहे थे। इसके बाद भी टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा।
विराट कोहली के वो 9 शतक जिनके बाद भारत हारा
| साल | विपक्षी टीम | कोहली का स्कोर | हार का अंतर |
| 2011 | इंग्लैंड | 107 | डकवर्थ लुईस (DLS) से हार |
| 2014 | न्यूजीलैंड | 123 | 24 रन |
| 2016 | ऑस्ट्रेलिया | 117 | 3 विकेट |
| 2016 | ऑस्ट्रेलिया | 106 | 25 रन |
| 2017 | न्यूजीलैंड | 121 | 6 विकेट |
| 2018 | वेस्टइंडीज | 107 | 43 रन |
| 2019 | ऑस्ट्रेलिया | 123 | 32 रन |
| 2025 | दक्षिण अफ्रीका | 102 | 4 विकेट |
| 2026 | न्यूजीलैंड | 124 | 41 रन |
करियर का पहला शतक और टीम इंडिया की हार
कोहली के करियर का पहला शतक (107 रन) 16 सितंबर 2011 को इंग्लैंड के खिलाफ आया था, लेकिन वह मैच भारत हार गया। इसके बाद 2014 में न्यूजीलैंड के नेपियर में कोहली ने 123 रनों की जुझारू पारी खेली थी, लेकिन मध्यक्रम के फ्लॉप होने के कारण भारत 24 रनों से चूक गया।
ऑस्ट्रेलियाई चुनौती
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोहली का रिकॉर्ड शानदार है, लेकिन तीन बार ऐसा हुआ जब उनके शतक बेकार गए। 2016 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने लगातार दो मैचों में शतक (117 और 106) जड़े, लेकिन भारतीय गेंदबाजी कंगारू बल्लेबाजों को रोकने में नाकाम रही। 2019 में भी रांची वनडे में उनके 123 रन ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को नहीं रोक सके। 2017 में मुंबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने 200वें वनडे मैच में कोहली ने 121 रन बनाए थे, लेकिन टॉम लैथम और रॉस टेलर की साझेदारी ने भारत से जीत छीन ली। 2018 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पुणे में 107 रन बनाने के बावजूद भारत को 43 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
ये 9 मैच दर्शाते हैं कि विराट कोहली ने हर परिस्थिति और हर बड़े प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अपना लोहा मनवाया है। उनकी पारियों में निरंतरता रही है, लेकिन जीत के लिए जरूरी टीम के प्रदर्शन की कमी अक्सर इन शतकों पर भारी पड़ी। फैंस के लिए ये पारियां भले ही बदकिस्मत रही हों, लेकिन ये कोहली की खेल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।















