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  • वैज्ञानिकों ने बनाया ‘स्‍लीपFM’, इंसान की नींद देखकर बता देगा भविष्‍य में होने वाली 130 बीमारियों का खतरा

    नई दिल्ली : अगर आप सोचते हैं कि नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए होती है, तो अब यह सोच बदलने का वक्त है। अमेरिका की स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक रिसर्च में पता चला है कि हमारी एक रात की नींद आने वाले कई वर्षों की सेहत की जानकारी दे सकती है। दिल


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    By Azad Hind Desk जनवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली : अगर आप सोचते हैं कि नींद सिर्फ थकान मिटाने के लिए होती है, तो अब यह सोच बदलने का वक्त है। अमेरिका की स्टैनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक रिसर्च में पता चला है कि हमारी एक रात की नींद आने वाले कई वर्षों की सेहत की जानकारी दे सकती है। दिल की बीमारी, स्ट्रोक, डिमेंशिया (याददाश्त की बीमारी), किडनी फेल होना और यहां तक कि मौत का खतरा भी, इन सबका अंदाजा नींद के पैटर्न से लगाया जा सकता है। यह रिसर्च नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें वैज्ञानिकों ने एक खास AI मॉडल तैयार किया है, जिसका नाम है SleepFM। यह मॉडल इंसान की नींद के दौरान शरीर में होने वाली गतिविधियों को समझकर भविष्य में होने वाली 130 बीमारियों का अनुमान लगाता है।

    AI मॉडल का रिजल्ट 75% तक रहा सटीक

    AI मॉडल की भविष्यवाणी की सी-इंडेक्स पर सटीकता 0.75 से अधिक आई है, यानी करीब 75% मामलों में AI मॉडल ने सही जानकारी दी। हार्ट अटैक के मामलों में मॉडल ने 10 में से 8 अनुमान सही बताए। इसी तरह डिमेंशिया के 8.5, किडनी रोग के करीब 8, स्ट्रोक के 7.8 और ब्रेस्ट कैंसर के 10 में से करीब 9 अनुमान सही रहे। इस रिसर्च में करीब 65 हजार लोगों की नींद से जुड़ा डेटा इस्तेमाल किया गया। यह डेटा करीब 5 लाख 85 हजार घंटों की नींद का था।

    आखिर नींद में ऐसा क्या होता है?

    जब हम सोते हैं, तब हमारा दिमाग, दिल, सांस और मांसपेशियां लगातार काम कर रही होती हैं। नींद के दौरान दिमाग की तरंगें बदलती हैं, दिल की धड़कन धीमी या तेज होती है, सांस लेने का तरीका बदलता है और शरीर पूरी तरह आराम की स्थिति में जाता है। डॉक्टर जिस जांच को ‘स्लीप टेस्ट’ कहते हैं, उसमें इन सभी संकेतों को रेकॉर्ड किया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई बार इन बीमारियों के लक्षण शरीर में बहुत पहले दिखने लगते हैं, लेकिन हम उन्हें समझ नहीं पाते। नींद उन शुरुआती संकेतों को पकड़ सकती है।

    डिमेंशिया और दिल की बीमारी में नींद का खास रोल

    रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों की नींद बार-बार टूटती है या जिनकी नींद के कुछ खास चरण ठीक से पूरे नहीं होते, उनमें आगे चलकर दिमागी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है। इसी तरह सांस से जुड़ी गड़बड़ियां और नींद में ऑक्सीजन की कमी दिल और फेफड़ों की बीमारियों से जुड़ी पाई गई। इस मॉडल ने यह भी दिखाया कि अलग-अलग बीमारियों के लिए नींद के अलग संकेत अहम होते हैं। दिमाग से जुड़ी बीमारियों में दिमागी गतिविधियां ज्यादा मायने रखती हैं, जबकि दिल की बीमारियों में दिल की धड़कन और सांस से जुड़े संकेत ज्यादा जरूरी होते हैं।

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