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  • शीशे की तरह चमकती है ये लकड़ी! ईंट-पत्थर के घरों के लिए नया विकल्प, बिजली का बिल भी कर देगी आधा

    वैज्ञानिकों ने ऐसी स्‍मार्ट खिड़की बना दी है, जो घरों में सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रावॉयलेट (UV) किरणों को आने से रोकेगी। इस ख‍िड़की की सबसे बड़ी खूबी है इसकी लकड़ी। इसे लिक्‍व‍िड क्र‍िस्‍टल मिलाकर तैयार किया गया है, जिससे लकड़ी किसी शीशे की तरह चमकती है। यह कमाल दक्ष‍िण कोरिया के वैज्ञानिकों ने किया है।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
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    वैज्ञानिकों ने ऐसी स्‍मार्ट खिड़की बना दी है, जो घरों में सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रावॉयलेट (UV) किरणों को आने से रोकेगी। इस ख‍िड़की की सबसे बड़ी खूबी है इसकी लकड़ी। इसे लिक्‍व‍िड क्र‍िस्‍टल मिलाकर तैयार किया गया है, जिससे लकड़ी किसी शीशे की तरह चमकती है। यह कमाल दक्ष‍िण कोरिया के वैज्ञानिकों ने किया है। अगर भविष्‍य में यह तकनीक जमीन पर उतरती है तो ईंट-पत्‍थर से बनने वालों घरों के लिए एक नया विकल्‍प मिल जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, घर में लगने के बाद यह स्‍मार्ट खिड़की उसे ठंडा या गर्म रखने में मदद करेगी। इसे चलाने के लिए किसी बिजली, सेंसर या कंट्रोल सिस्‍टम की जरूरत नहीं है। ये उपाय बिजली भी बचाएंगे।

    कैसे बनाई स्‍मार्ट विंडो

    इस स्‍मार्ट विंडो को दक्ष‍िण कोरिया की हानबाट नेशनल यूनिवर्सिटी और कोंगजू नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने तैयार किया है। engineering.princeton के अनुसार, विंडो बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने बाल्सा नाम की लकड़ी को मॉड‍िफाई क‍िया। उन्‍होंने उसमें लिक्‍व‍िड क्र‍िस्‍टल मिलाए। इस तरह एक पारदर्शी लकड़ी तैयार हुई।

    स्‍मार्ट विंडो की प्रमुख खूबियां

    यह स्‍मार्ट खिड़की देखने में लकड़ी की नहीं लगती। क्र‍िस्‍टल मिलाने से यह एक बारीक शीशे की तरह हो गई है। किसी कमरे में लगाने के बाद यह उसकी विजिब‍िलिटी को कंट्रोल कर सकती है यानी कितनी रोशनी कमरे में आनी चाहिए और कितनी नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्‍मार्ट विंडो को ऐसी जगहों पर खासतौर से इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जहां हीटिंग या कूलिंग में बहुत ज्‍यादा बिजली खर्च होती है। आमतौर पर स्‍मार्ट विंडो, बिजली का इस्‍तेमाल करती हैं, लेकिन यह पारदर्शी ख‍िड़की उस जरूरत को भी खत्‍म कर देती है।

    रिसर्च की बड़ी बात

    वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया कि जब कमरा ठंडा हो तब स्‍मार्ट विंडो, पारदर्शी हो जाती है जिससे सूर्य की रोशनी आती है और कमरा गर्म होने में मदद मिलती है, लेकिन जब कमरा ज्‍यादा गर्म हो जाता है तो स्‍मार्टविंडो अपारदर्शी हो जाती है। इस पूरी प्रक्र‍िया में बिजली खर्च नहीं होती। रिसर्च के अनुसार, जब कमरे का तापमान सामान्‍य होता है तब स्‍मार्ट विंडो सिर्फ 28 फीसदी रोशनी को आने देती है। लेकिन जब तापमान बढ़ाकर 40 डिग्री तक पहुंचा तो इसने अपनी क्षमता को बढ़ा दिया। इससे अपने आप दिन की रोशनी कंट्रोल हो गई।

    भारत में कितनी कारगर यह तकनीक?

    Azad Hind नजर‍िया: हमारा मानना है क‍ि अगर यह तकनीक हकीकत में बदलती है और कमर्शल इस्‍तेमाल के लिए उपलब्‍ध होती है तो स्‍मार्ट विंडो भारत के घरों में जबरदस्‍त लाभ पहुंचा सकती हैं। देश में गर्मी और ठंड दोनों प्रमुख मौसम देखे जाते हैं। स्‍मार्ट विंडो के जरिए घरों का टेंपरेचर कंट्रोल करने में मदद मिले तो इससे बिजली बचाई जा सकती है। यह कांच और प्‍लास्टिक का भी बेहतर विकल्‍प बन सकती है।

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