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  • सऊदी अरब या UAE, किसके साथ पाकिस्तान? अरब दुनिया में वर्चस्व की जंग, वफादारी की परीक्षा में फंसे मुनीर

    इस्लामाबाद: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच जैसे जैसे संबंध बिगड़ते जा रहे हैं, पाकिस्तान के लिए मुसीबत उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है। दबाव के इस वक्त में पाकिस्तान की वफादारी की परीक्षा हो रही है। पाकिस्तान के दोनों ही देशों के साथ करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देशों


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    By Azad Hind Desk जनवरी 12, 2026
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    इस्लामाबाद: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच जैसे जैसे संबंध बिगड़ते जा रहे हैं, पाकिस्तान के लिए मुसीबत उतनी ही तेजी से बढ़ती जा रही है। दबाव के इस वक्त में पाकिस्तान की वफादारी की परीक्षा हो रही है। पाकिस्तान के दोनों ही देशों के साथ करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देशों के साथ पाकिस्तान के रक्षा और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं, इसीलिए अब पाकिस्तान किसके साथ और किसके खिलाफ खड़ा हो, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है। इसीलिए अभी तक पाकिस्तान ने सऊदी और यूएई के बीच चल रहे तनाव में चुप्पी बनाकर रखी है, जबकि यमन में चल रहे संघर्ष में सऊदी अरब, पाकिस्तान का सीधा साथ चाहता है।

    पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय रक्षा समझौता किया था, लेकिन बावजूद इसके वो सऊदी-UAE विवाद के समय सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का खुला समर्थन नहीं कर पा रहा है। यमन में हालिया संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने सिर्फ एक बार अप्रत्यक्ष तौर पर सऊदी अरब का समर्थन किया है, लेकिन पाकिस्तान की सेना और शहबाज शरीफ की सरकार ने जमीन पर UAE के खिलाफ सऊदी अरब का साथ नहीं दिया, जिससे सऊदी किंगडम के नाराज होने की भी आशंका है। लेकिन पाकिस्तान की चाहत सऊदी अरब के साथ साथ तुर्की के साथ भी सैन्य गठबंधन करने की है। पाकिस्तान की ख्वाहिश है कि तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते में शामिल हो। लेकिन पाकिस्तान सूडान की सेना को करीब 1.5 अरब डॉलर के हथियार भी बेचने वाला है, जिनका इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) पैरामिलिट्री के खिलाफ होगा।

    सऊदी-UAE के बीच तालमेल करवाने की कोशिश में पाकिस्तान
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को टेलीफोन किया। इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब के साथ एकजुटता की पुष्टि की है। लेकिन जब सऊदी अरब की सेना ने यमन में UAE की सैन्य संपत्तियों पर हमला किया, उस वक्त पाकिस्तान मुश्किल हालात में फंस गया, क्योंकि ठीक उसी वक्त UAE के राष्ट्रपति पाकिस्तान में एक अर्ध-आधिकारिक दौरे पर थे। इस दौरे के दौरान, UAE ने पाकिस्तान के फौजी फाउंडेशन में निवेश की घोषणा की, जिसे सेना चलाती है। UAE ने कहा है कि वो फौजी फाउंडेशन ग्रुप में लगभग एक अरब डॉलर के शेयर खरीदेगा। इसके अलावा इस डील में 2 अरब डॉलर के अतिरिक्त लोन को रोलओवर करने की योजना भी शामिल है।

    इस बीच माना जा रहा है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान के UAE को लेकर नरम रूख पर कड़ी नजर रख रहा है। उसने इस्लामाबाद को इसको लेकर संकेत और संदेश दोनों भेजे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान और सऊदी अरब, करीब दो अरब सऊदी लोन को JF-17 फाइटर जेट डील में बदलने के लिए बातचीत कर रहे हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के वायुसेना के उच्च अधिकारियों के बीच मुलाकात भी हुई है। लेकिन पाकिस्तान के लिए इस हफ्ते एक बार फिर मुश्किल स्थिति बन गई। इस हफ्ते, सऊदी अरब ने यमन के लिए जा रहे हथियारों को ले जा रहे UAE के एक शिपमेंट पर हमला कर दिया, जिससे सैन्य तनाव काफी बढ़ गया। इसके बाद उसने अबू धाबी पर “बेहद खतरनाक” कदम उठाने का आरोप लगाया, जिससे किंगडम की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा था। इसीलिए अब पाकिस्तान के ऊपर सऊदी और यूएई के बीच किसी एक को चुनने का भारी दबाव है और पाकिस्तान के लिए स्थिति दूध और मछली को एक साथ खाने जैसी हो गई है।

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