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  • सऊदी, बांग्लादेश, JF-17 लड़ाकू विमान की बढ़ी डिमांड, चीन के साथ बनाने वाला क्यों फंस गया पाकिस्तान?

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान दावे कर रहा है कि उसने पिछले कुछ महीनों में कम के कम पांच देशों के साथ अपने JF-17 लड़ाकू विमानों के बेचने के लिए बातचीत की है। इन देशों में सऊदी अरब और इंडोनेशिया प्रमुख हैं। लेकिन पाकिस्तान अपने लड़ाकू विमानों को लेकर देशों की बढ़ती दिलचस्पी से फंसता नजर आ रहा


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    By Azad Hind Desk फरवरी 3, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान दावे कर रहा है कि उसने पिछले कुछ महीनों में कम के कम पांच देशों के साथ अपने JF-17 लड़ाकू विमानों के बेचने के लिए बातचीत की है। इन देशों में सऊदी अरब और इंडोनेशिया प्रमुख हैं। लेकिन पाकिस्तान अपने लड़ाकू विमानों को लेकर देशों की बढ़ती दिलचस्पी से फंसता नजर आ रहा है। पाकिस्तान, चीन के साथ मिलकर JF-17 लड़ाकू विमान बनाता है। जिसमें चीन की हिस्सेदारी 65 प्रतिशत और पाकिस्तान की भागीदारी 35 प्रतिशत है। ऐसे में अगर पाकिस्तान को पांच देशों से वाकई ऑर्डर मिलते हैं तो उसके लिए इस डिमांड को पूरा करना अत्यंत मुश्किल हो जाएगा।

    पाकिस्तान की सेना के मुताबिक उसके फाइटर जेट में सऊदी अरब से लेकर इराक, इंडोनेशिया और बांग्लादेश ने गहरी दिलचस्पी दिखाई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अलग से रिपोर्ट किया कि सऊदी अरब और लीबिया भी इस एयरक्राफ्ट की तरफ देख रहे हैं। हालांकि जिन देशों को लेकर पाकिस्तान की सेना की तरफ से दावे किए गये हैं, उनमें से किसी भी देश ने पुष्टि नहीं की है।

    पाकिस्तान JF-17 लड़ाकू विमान को लेकर क्यों फंसा?
    दरअसल, पाकिस्तान के पास हर साल 20 से कम JF-17 लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता है। ये सभी फाइटर जेट जो पाकिस्तान में हर साल बन रहे हैं, वो पाकिस्तान की वायुसेना को ही चले जाते हैं। इसीलिए पाकिस्तान अभी तक साफ नहीं कर पाया है अगर उसे वाकई ऑर्डर मिलते हैं, तो वो इस बढ़ी हुई डिमांड को कैसे पूरी कर पाएगा। पाकिस्तान, अपने JF-17 लड़ाकू विमान को बेचकर अपनी हथियारों की निर्यात क्षमता को बढ़ाना चाहता है और क्षेत्रीय वर्चस्व के तौर पर पेश कर रहा है, लेकिन दिक्कत ये है कि वो इतने विमान आखिर कैसे बना पाएगा?

    सिंगापुर में एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो मनोज हरजानी ने कहा, “JF-17 को इसकी किफायती कीमत और, इससे भी ज़रूरी, हाल ही में युद्ध में मिली सफलता की वजह से ‘मार्केट में बदलाव लाने वाला’ माना जा रहा है।” “यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि JF-17 को और ज़्यादा अपनाया जाएगा, खासकर उन सेनाओं द्वारा जो पश्चिमी कंपनियों द्वारा बनाए गए फाइटर जेट्स नहीं खरीद सकतीं।”

    क्या पाकिस्तान वाकई JF-17 लड़ाकू विमान बेच पाएगा?
    एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंगापुर में एस राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च फेलो मनोज हरजानी ने कहा कि “JF-17 को इसकी किफायती कीमत की वजह से’मार्केट में बदलाव लाने वाला’ माना जा रहा है।” उन्होंने कहा कि “यह कल्पना करना मुश्किल नहीं है कि JF-17 को और ज्यादा अपनाया जाएगा, खासकर उन सेनाओं की तरफ से, जो पश्चिमी देशों के फाइटर जेट को खरीदने की क्षमता नहीं रखते हैं।” खासकर अगर इंडोनेशिया और सऊदी अरब JF-17 खरीदते हैं, तो पाकिस्तान की क्षमता में ये एक बहुत बड़ा उछाल होगा।

    लेकिन कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। जैसे फ्रांस ने इंडोनेशिया की वायुसेना को राफेल फाइटर जेट की डिलीवरी शुरू कर दी है, जबकि इंडोनेशिया ने 2023 में बोइंग कंपनी के साथ 24 F-15 जेट खरीदने पर सहमति जताई थी। इसी तरह सऊदी अरब भी अमेरिकी और यूरोपीय विमानों पर निर्भर है। सऊदी अरब और अमेरिका के बीच F-35 लड़ाकू विमान की बिक्री को लेकर भी बात चल रही है, ऐसे में क्या सऊदी, पाकिस्तानी जेट को अपने बेड़े में शामिल करेगा, ये बड़ा सवाल है।

    JF-17 लड़ाकू विमान की कीमत क्या है?
    JF-17 की कीमत काफी कम है। पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री रज़ा हयात हरराज ने पिछले महीने BBC उर्दू को बताया था कि इसकी हर यूनिट की कीमत 40 मिलियन डॉलर से 50 मिलियन डॉलर है। जबकि राफेल और F-16 के कुछ वर्जन की कीमत 100 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। जर्मन मार्शल फंड इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम के सीनियर फेलो समीर लालवानी ने कहा कि लड़ाकू विमान के उत्पादन बढ़ाने को बढ़ाने के लिए भारी भरकम निवेश की जरूरत होगी और पाकिस्तान इसके लिए फंड कहां से लाएगा?

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