मोदी सरकार ने यूरोपीय संघ के 27 देशों से आने वाली कुछ खास कारों पर तुरंत टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। इनमें वे कारें होंगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (लगभग 17,739 डॉलर) से ज्यादा है। दो सूत्रों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ यह टैक्स और कम होकर 10% तक घट जाएगा। इससे वॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी यूरोपीय कार कंपनियों के लिए भारतीय बाज़ार में अपनी कारें बेचना आसान हो जाएगा।
EU GSP Rules: भारत-ईयू एफटीए फाइनल से पहले यह ‘झटका’ वाकई करे-धरे पर फेरेगा पानी? सामने आया बड़ा अपडेट
अमेरिका की भरपाई?
हालांकि सूत्रों का कहना है कि अभी बातचीत गोपनीय है और इसमें आखिरी समय में बदलाव भी हो सकते हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय और यूरोपीय आयोग ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि भारत और यूरोपीय संघ मंगलवार को फ्री ट्रेड डील को पूरा करने का ऐलान करेंगे। इसके बाद दोनों पक्ष इस डील के बाकी हिस्सों को फाइनल करेंगे और इसे मंजूरी देंगे। इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी डील कहा जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा और भारत से होने वाले निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातकों को काफी नुकसान हुआ है।
बिक्री के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। लेकिन भारत का अपना ऑटोमोबाइल उद्योग दुनिया में सबसे ज्यादा सुरक्षित उद्योगों में से एक रहा है। देश में आयातित कारों पर 70% और 110% का टैक्स है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और कई विदेशी कार कंपनियां इस पर आपत्ति जताते रहे हैं। एक सूत्र ने बताया कि भारत ने तत्काल प्रभाव से लगभग 2 लाख पेट्रोल-डीजल कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी को 40% तक कम करने का प्रस्ताव दिया है। यह इस सेक्टर को खोलने की दिशा में भारत का सबसे बड़ा कदम है। हालांकि, इस कोटे में आखिरी समय में बदलाव हो सकते हैं।
क्या ‘ट्रेड बाजूका’ से डर गए ट्रंप? टैरिफ की धमकी के बाद क्यों लिया यू-टर्न, ईयू के पास यह कैसा हथियार
EV में कोई कटौती नहीं
यह भी बताया गया है कि पहले पांच साल तक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर इंपोर्ट ड्यूटी में कोई कमी नहीं की जाएगी। इसका मकसद महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों के निवेश को बचाना है। पांच साल बाद ईवी पर भी इसी तरह टैक्स कम किया जाएगा। इंपोर्ट टैक्स में कमी से Volkswagen, रेनॉ और Stellantis को फायदा होगा। साथ ही, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी कार कंपनियों को भी फायदा होगा। ये कंपनियां भारत में कारें बनाती तो हैं, लेकिन ज्यादा टैक्स की वजह से अपने कारोबार को एक खास स्तर से आगे नहीं बढ़ा पा रही थीं।
एक सूत्र ने बताया कि कम टैक्स की वजह से कार निर्माता कंपनियां आयातित गाड़ियों को सस्ती कीमत पर बेच सकेंगी। फिलहाल, भारत के 44 लाख यूनिट के सालाना कार बाजार में यूरोपीय कार निर्माताओं की हिस्सेदारी 4% से भी कम है। इस बाजार पर जापान की सुजुकी मोटरका दबदबा है। साथ ही महिंद्रा और टाटा जैसी भारतीय कंपनियां भी हैं। इनकी कुल मिलाकर बाजार में दो-तिहाई हिस्सेदारी है। उम्मीद की जा रही है कि 2030 तक भारतीय कार बाजार बढ़कर 60 लाख यूनिट प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगा।












