आपको बता दें कि अमेरिका जब अफगानिस्तान युद्ध लड़ रहा था उस वक्त तालिबान के लड़ाके फिदायीन हमला करते थे। वो गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे। उस दौरान अफगानिस्तान में हर दूसरे दिन बम धमाके होते रहते थे। जिस आखिरी दिन अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से बाहर निकल रहे थे उस दिन भी काबुल में भयानक बम धमाका हुआ था जिसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि सिराजुद्दीन हक्कानी पाकिस्तान को वैसी ही धमकी दे रहे हैं।
गुरिल्ला युद्ध लड़ने में माहिर हैं तालिबान के लड़ाके
एक दिन पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के नेता मुफ्ती नूर वली महसूद ने पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हमलों का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि “हम इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान को बचाने के मकसद से आए हैं। क्योंकि अभी उस पर हमला हो रहा है इसलिए मैं लड़ाकों को बड़े पैमाने पर हमले करने का आदेश देता हूं।” टीटीपी का खैबर पख्तूनख्वा में काफी वर्चस्व है और उसे लोगों का समर्थन हासिल है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए हमलों को रोकना काफी मुश्किल साबित हो सकता है।
इसीलिए तालिबान के गुरिल्ला युद्ध के मास्टरमाइंड सिराज हक्कानी का खोस्त का भाषण बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण और खतरनाक है। उन्होंने वहां पाकिस्तान से ‘बदला’ लेने की बात कही है। हक्कानी का मॉडल, तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब के खुलकर युद्ध लड़ने के मॉडल से अलग है। मुल्का याकूब ने अफगान तोपों के मुंह को पाकिस्तान की तरफ मोड़ दिया है, लेकिन हक्कानी फिदायीन हमले की बात कर रहे हैं। हक्कानी युद्ध को अफगानिस्तान की धरती पर नहीं बल्कि पाकिस्तान की धरती पर ले जाना चाहते हैं, इसलिए ये काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
पाकिस्तान क्या एक बड़े युद्ध में फंसेगा?
हक्कानी नेटवर्क और तालिबान के लड़ाकों ने 20 सालों तक अमेरिकी सैनिकों को छकाया और थकाया। अरबों डॉलर फूंकने के बाद अमेरिका थक-हारकर अफगानिस्तान से लौट गया। इसलिए हक्कानी असीम मुनीर को धमका रहे हैं कि जिस क्षमता से उन्होंने 20 साल तक दुनिया की सबसे बड़ी ताकत NATO को थकाया अगर वैसी ही ताकत, पाकिस्तान के खिलाफ एक दिन भी लगा दी जाए तो पाकिस्तान का भूगोल बदल जाएगा। हक्कानी मॉडल का मतलब साफ है कि वह पाकिस्तान के अंदरूनी शहरों को निशाना बनाने की कोशिश करेंगे।













