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  • सुप्रीम कोर्ट पहुंचा Neet PG माइनस कटऑफ का मुद्दा, जनहित याचिका दाखिल, डॉक्टर क्यों कर रहे विरोध?

    नई दिल्ली: देशभर के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी पोस्टग्रैजुएट की मेडिकल सीटों को भरने के लिए कुछ कैटेगरी में क्वॉलिफाइंग कटऑफ को जीरो पसेंटाइल और स्कोर को माइनस 40 तक घटाने के फैसले के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इस फैसले को


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    By Azad Hind Desk जनवरी 17, 2026
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    नई दिल्ली: देशभर के मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी पोस्टग्रैजुएट की मेडिकल सीटों को भरने के लिए कुछ कैटेगरी में क्वॉलिफाइंग कटऑफ को जीरो पसेंटाइल और स्कोर को माइनस 40 तक घटाने के फैसले के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध तेज हो गया है। डॉक्टरों के संगठन यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

    UDF के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और अन्य डॉक्टरों द्वारा दायर यह याचिका में नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती देती है, जिसमें पोस्ट ग्रैजुएट मेडिकल दाखिले के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों में ऐतिहासिक कटौती की गई।

    क्यो घटी कटऑफ ?

    दरअसल,मेडिकल पीजी कोर्स की लगभग 18 हजार सीटें खाली पड़ी हैं और इन्हें भरने के लिए कटऑफ में भारी गिरावट की गई है। हालांकि रेजिडेंट डॉक्टरों का तर्क है कि सीटें भरने के नाम पर न्यूनतम योग्यता मानकों को खत्म करना किसी भी तरह से समाधान नहीं है।

    UDF के नैशनल जनरल सेक्रेटरी डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि इससे मेडिकल प्रोफेशन में भरोसा कमजोर होगा और इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

    कितनी घटी कटऑफ ?

    • सामान्य वर्ग और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए क्वॉलिफाइंग 50 पसेंटाइल को 7 पसेंटाइल कर दिया गया है।
    • एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए पसेंटाइल 40 से घटाकर कर दिया गया है।
    • बेंचमार्क दिव्यांगता वाले जनरल कैटिगरी (PwBD) के लिए 45 से घटाकर 5 पर्सेटाइल कर दिया गया

    विरोध में क्या तर्क दिए ?

    डॉक्टर लक्ष्य मित्तल ने बताया कि जीरो या नेगेटिव नंबर प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को पीजी मेडिकल ट्रेनिंग के लिए योग्य ठहराना न सिर्फ मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करता है, बल्कि इससे मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा होता है।

    डॉक्टरों ने लिखा स्वास्थ्य मंत्री को पत्र

    इस बीच फोर्डा ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में कहा है कि नीट पीजी की कटऑफ में इस तरह की कटौती से योग्य और मेहनती उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा और पोस्टमैग्रैजुएट मेडिकल शिक्षा की साख को नुकसान पहुंचेगा। संगठन ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और न्यूनतम क्वालिफाइड मानको को बहाल करने की मांग की है।

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