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  • सैम आल्टमैन की भविष्यवाणी, सीईओ और वैज्ञानिकों से बेहतर काम करेगी तकनीक, सुपर इंटेलिजेंस से सिर्फ कुछ साल दूर

    राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में ओपन एआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर बेहद बड़ी और चौंकाने वाली भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि शुरुआती सुपर इंटेलिजेंस आने में अब सिर्फ कुछ साल बाकी हैं और 2028 के अंत तक दुनिया की अधिकतर बौद्धिक क्षमता


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    By Azad Hind Desk फरवरी 20, 2026
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    राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 में ओपन एआई के सीईओ सैम आल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को लेकर बेहद बड़ी और चौंकाने वाली भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि शुरुआती सुपर इंटेलिजेंस आने में अब सिर्फ कुछ साल बाकी हैं और 2028 के अंत तक दुनिया की अधिकतर बौद्धिक क्षमता डेटा सेंटर्स के भीतर हो सकती है, इंसानों के बाहर नहीं।

    आल्टमैन ने कहा कि एआई की प्रगति की रफ्तार हैरान करने वाली है। हमने ऐसे सिस्टम से शुरुआत की थी जो हाईस्कूल स्तर का गणित भी ठीक से नहीं कर पाते थे। आज एआई रिसर्च-लेवल गणित हल कर रही है और सैद्धांतिक भौतिकी में नए नतीजे निकाल रही है।

    सुपरइंटेलिजेंस ले सकती हैं बेहतर फैसला

    उन्होंने साफ कहा कि विकास के किसी चरण पर सुपरइंटेलिजेंस बड़ी कंपनियों के सीईओ से बेहतर फैसले ले सकती है और बेहतरीन वैज्ञानिकों से बेहतर रिसर्च कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह शक्ति जितनी संभावनाएं लाती है, उतनी ही अनिश्चितताएं भी साथ लाती है।

    भारत की भूमिका पर खास टिप्पणी

    आल्टमैन ने भारत की खुलकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि भारत में हर हफ्ते करोड़ों लोग चैट जीपीटी का इस्तेमाल कर रहे हैं जिनमें एक बड़ा हिस्सा छात्रों का है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सिर्फ एआई बनाएगा ही नहीं बल्कि यह भी तय कर सकता है कि भविष्य कैसा दिखेगा।

    रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

    आल्टमैन ने माना कि एआई से कई नौकरियां प्रभावित होंगी। जीपीयू से ज्यादा मेहनत करना मुश्किल होगा, लेकिन इंसान नए और बेहतर काम भी खोज लेंगे। तकनीक हमेशा नौकरियां बदलती है, खत्म नहीं करती। उन्होंने इसे एक पीढ़ीगत चुनौती बताया और कहा कि हर पीढ़ी नई तकनीक से आगे बढ़ती है। हमारा नैतिक दायित्व है कि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर अवसर दें।

    उन्होंने तर्क दिया कि तकनीक हमेशा से ही नौकरियों को बदलती रही है, लेकिन इंसान हमेशा नए और बेहतर काम ढूंढ लेता है। उन्होंने एक रोचक उदाहरण देते हुए कहा कि आज से 500 साल बाद के लोग शायद हमारे आज के कामों को बेकार समझेंगे और हमें उन अमीर लोगों की तरह देखेंगे जो अपना समय बिताने के लिए खेल खेलते हैं।

    एक देश या कंपनी के हाथों में एआई का नियंत्रण होना खतरनाक

    सैम ऑल्टमैन ने चेतावनी दी कि एआई तकनीक का नियंत्रण अगर किसी एक कंपनी या एक देश के हाथ में केंद्रित हो गया, तो यह दुनिया को बर्बादी की ओर ले जा सकता है। उनके मुताबिक आने वाले दशकों का आदर्श भविष्य आज़ादी, लोकतंत्र, व्यापक समृद्धि और इंसानी क्षमता के विस्तार वाला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई पर साझा नियंत्रण ज्यादा सुरक्षित रास्ता है। इससे कुछ छोटी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन यह उस बड़े खतरे से बेहतर है जिसमें एक ताकतवर सत्ता पूरी दुनिया पर तकनीकी वर्चस्व कायम कर ले और तानाशाही व्यवस्था मजबूत हो जाए।

    न्यूक्लियर वाचडॉग जैसा ढांचा जरूरी

    सैम आल्टमैन ने चेतावनी दी कि तेजी से आगे बढ़ रही एआई तकनीक भविष्य में इतने शक्तिशाली बायो-मॉडल तैयार कर सकती है जो नए और खतरनाक पैथोजन (रोग फैलाने वाले वायरस या बैक्टीरिया) बनाने में मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि अगर ये मॉडल ओपन-सोर्स में उपलब्ध हुए, तो गलत इरादे रखने वाले लोग उनका दुरुपयोग कर सकते हैं। हमें पूरे समाज के स्तर पर सोचना होगा कि इससे कैसे बचाव किया जाए।

    आल्टमैन के मुताबिक, यह सिर्फ किसी एक कंपनी या देश की जिम्मेदारी नहीं है। जिस तरह परमाणु तकनीक पर निगरानी के लिए इंटरनेशनल एटोमिक एनर्जी एजेंसी बनाई गई, उसी तरह एआई के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल और निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।

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