आसिफ ने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा कि साल 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन के हमले के बाद रू हुए युद्ध के दौरान अफगान लड़ाकों को पाकिस्तान ने मदद की। पाकिस्तान अफगान रेजिस्टेंस लीडर्स के साथ पूरे दिल से खड़ा रहा और लाखों अफगानिसियों को शरण दी। हमने अफगानियों को अपना मानकर उनका साथ दिया।
हक्कानी नेटवर्क से आसिफ की अपील
ख्वाजा आसिफ ने आगे कहा, 1979 की लड़ाई के बाद से अफगानिस्तान के लाखों लोग पाकिस्तान की जमान पर हैं। हमने उनको मेहमान की तरह माना। आसिफ ने हक्कानी नेताओं को यह साफ करने की चुनौती दी कि पाकिस्तान ने उनको सपोर्ट दिया था या नहीं। हक्कानी नेटवर्क के लोग दुनिया को सच बताएं।
आसिफ ने मौजूदा हक्कानी नेताओं से अपनी विरासत को बनाए रखते हुए पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच आपसी दखल ना देने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘हम आपसे कुछ नहीं मांगते। बस हर तरह से हमारे दुश्मनों को अपने घर में बसाओ। उनके साथ मिलकर हमारे खिलाफ दुश्मन का रोल मत निभाओ।’
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में तनाव
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान पाकिस्तानी सेना और अफगानिस्तान सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती झड़पों के बीच आया है। बीते कुछ दिनों से बॉर्डर पर भारी फायरिंग देखी जा रही है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले भी किए हैं। इन हमलों में 200 से ज्यादा लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है। शुक्रवार को खोस्त प्रांत में हक्कानी ने कहा कि पाकिस्तान हमले करने से बाज आए। पाकिस्तान समझ ले कि अगर उसके खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया गया तो नतीजे गंभीर होंगे। हम बताना चाहते हैं कि तालिबान के लोग अफगानिस्तान की रक्षा में सबसे आगे रहेंगे।












