• Technology
  • हजारों साल पुराना रास्‍ता और अंतरिक्ष की लेटेस्ट तकनीक, नौसेना के INSV कौंडिन्य को ‘OneWeb’ ने दी ताकत

    भारतीय नौसेना का जहाज जिसे 2 हजार साल पुरानी पाल विध‍ि से बनाया गया है, वह 18 दिनों की यात्रा पूरी करके बुधवार को गुजरात से ओमान पहुंच गया। INSV कौंडिन्य नाम के इस जहाज में सैटेलाइट कनेक्‍ट‍िव‍िटी जोड़ी गई थी, ज‍िसकी मदद से जहाज में सवार सदस्‍य बाकी दुन‍िया से जुड़े हुए थे। बताया


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 14, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    भारतीय नौसेना का जहाज जिसे 2 हजार साल पुरानी पाल विध‍ि से बनाया गया है, वह 18 दिनों की यात्रा पूरी करके बुधवार को गुजरात से ओमान पहुंच गया। INSV कौंडिन्य नाम के इस जहाज में सैटेलाइट कनेक्‍ट‍िव‍िटी जोड़ी गई थी, ज‍िसकी मदद से जहाज में सवार सदस्‍य बाकी दुन‍िया से जुड़े हुए थे। बताया गया है क‍ि जहाज में सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी वनवेब के नेटवर्क को इस्‍तेमाल क‍िया गया। वनवेब का LEO यानी लो-अर्थ ऑर्बिट नेटवर्क INSV कौंडिन्य को समुद्री यात्रा के दौरान बाकी दुनिया से जोड़े रखने में मददगार रहा। वनवेब का सीधा मुकाबला एलन मस्‍क की स्‍टारलिंक से है। दोनों कंपनियों सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में काम करती हैं।

    वनवेब में भारती एंटरप्राइजेस की हिस्‍सेदारी भी है जो भारत में ‘एयरटेल’ को चलाती है। INSV कौंडिन्य जहाज इसलिए सबसे खास है क्‍योंकि इसे 2 हजार साल पुरानी पाल विधि से बनाया गया है। इतनी पुरानी व‍िध‍ि से बनाए जाने की वजह से इसमें कोई कम्‍युन‍िकेशन स‍िस्‍टम नहीं था। ऐसे में सैटेलाइट कनेक्‍ट‍िव‍िटी को इस जहाज से जोड़ा गया। जहाज में वनवेब लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कनेक्टिविटी को लगाया गया। कंपनी का कहना है कि पूरी यात्रा के दौरान सैटेलाइट कनेक्‍ट‍िविटी ने अपना काम किया। यात्रा का मकसद समुद्री व्यापार मार्गों को फिर से खोजना, भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को दिखाना और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देना है।

    सैटेलाइट इंटरनेट से बाकी दुनिया से जुड़ा क्रू

    आज़ाद हिन्द टेक के पास आई जानकारी के अनुसार, वनवेब की सैटेलाइट इंटरनेट कनेक्‍ट‍िविटी की वजह से जहाज पर मौजूद लोगों ने भरोसेमंद और रियल-टाइम कम्‍युनिकेशन क‍िया। जैसाकि हमने बताया इस जहाज को पुरानी विधि से बनाया गया है, इसलिए इसमें कम्‍युनिकेशन की कोई सुविधा नहीं थी। ऐसे में वनवेब की LEO तकनीक को जहाज पर इस्‍तेमाल किया गया।

    ‘क्रू के लिए कीमती रही सैटेलाइट कनेक्‍ट‍िविटी’

    प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य और कौंडिन्य प्रोजेक्ट के मुख्य सदस्य और आर्किटेक्ट, साजीव सान्याल ने कहा कि पूरी यात्रा के दौरान, एयरटेल वनवेब से मिली भरोसेमंद सैटेलाइट कनेक्टिविटी क्रू के लिए बहुत कीमती रही। इसने हमें जमीन पर मौजूद टीमों से जुड़े रहने में मदद की, जिससे संचार, लाइव फीड और मुश्किल समुद्री सफर के दौरान उनका मनोबल बना रहा।

    वनवेब के सैटेलाइट नेटवर्क की मदद से यात्रा से जुड़े लाइव अपडेट भेजे गए। यह दिखाता है कि कैसे सैटेलाइट कनेक्टिविटी किसी मिशन के लिए मजबूत और टिकाऊ है। ईटेलसैट की APAC की रीजनल वाइस प्रेसिडेंट और वनवेब इंडिया की बोर्ड डायरेक्टर, नेहा इडनानी ने कहा कि हमें इस बात का गर्व है कि ईटेलसैट को इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए कनेक्टिविटी देने का मौका मिला।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।