सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय और वाणिज्य विभाग का भारतीय वाणिज्य दूतावासों के लिए संदेश एकदम साफ है: “हर एक देश जरूरी होता है”। PMO के अधिकारियों ने भारतीय मिशनों, विदेश मंत्रालय और व्यापार संघों के साथ कम से कम पांच बैठकें की हैं। इन बैठकों में निर्यात को बढ़ाने पर जोर दिया गया ताकि भारत के निर्यात में विविधता आए।
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प्राथमिकता देने का निर्देश
दूतावासों को इस काम को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है। हाल के महीनों में जब अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाए थे, तब वाणिज्य विभाग 20 देशों और छह उत्पाद श्रेणियों पर काम कर रहा था। लेकिन सरकार ने अब निर्यात के लिए नए देशों और आयात के लिए नए स्रोतों की तलाश करने पर भी जोर दिया है। साथ ही, निर्यात होने वाले उत्पादों में भी विविधता लाने की बात कही गई है।
एक अधिकारी ने बताया, “जिन देशों से हमारा निर्यात 100-200 मिलियन डॉलर का भी है, उन्हें भी प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे कई छोटे देशों से निर्यात बढ़ने पर कुल निर्यात में अच्छा इजाफा हो सकता है।” प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास ने वाणिज्य विभाग और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में करीब 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। ये बैठकें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनिंदा निर्यातकों के साथ हुई चर्चाओं के बाद हुईं।
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मौजूदगी का फायदा
एक अन्य अधिकारी ने कहा, “विविधता लाना बेहतर है। जहां भी छोटा या बड़ा मौका मिले, हमें सप्लाई चेन में शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए। आज का हर छोटा बाजार कल एक बड़ा अवसर बन सकता है। हमें इसे मौजूदा आकार से नहीं देखना चाहिए और वहां अपनी मौजूदगी का फायदा उठाना चाहिए।” इसके अलावा, हर मिशन को एक विस्तृत रणनीति जारी की गई है।
वाणिज्य विभाग के हर क्षेत्रीय डिवीजन और विदेश मंत्रालय में उस क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी को व्यापार संघों के साथ मिलकर हर महीने समीक्षा करने को कहा गया है। एक अधिकारी ने बताया कि वाणिज्य दूतावासों को ई-कॉमर्स, पर्यावरण के अनुकूल निर्यात, स्वदेशी और जीआई-टैग वाले उत्पाद और ग्लोबल ब्रांडिंग जैसी पहलों को बढ़ावा देना होगा।
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ब्रांड इंडिया
साथ ही ‘ब्रांड इंडिया’ को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मिशनों की एक अहम जिम्मेदारी ट्रेड इंटेलिजेंस और मार्केट रिसर्च होगी। इसके अलावा, बदलते नियमों और गैर-टैरिफ बाधाओं पर भी नजर रखनी होगी। इन बाधाओं को जल्दी पहचान कर सरकार को सूचित करना होगा ताकि सरकार समय पर कार्रवाई कर सके।
यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत अपने निर्यात को बढ़ा सके और दुनिया भर के बाज़ारों में अपनी पैठ मज़बूत कर सके। छोटे से छोटे देश को भी नज़रअंदाज़ न करने की यह नीति भारत के आर्थिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह दिखाता है कि सरकार हर अवसर का पूरा फ़ायदा उठाना चाहती है।













