मॉरीशस पर जमकर बरसे मुइज्जू
मुइज्जू ने कहा, “भले ही वे मालदीव के साथ डिप्लोमैटिक रिश्ते तोड़ दें, अगर मॉरीशस चागोस पर संप्रभुता के लायक नहीं है, तो वे कभी भी इसके लायक नहीं होंगे।” मुइज्जू ने आगे कहा, “अगर कोई देश चागोस देता है, तो उसे उसके असली मालिक को सौंप देना चाहिए। इसलिए अगर कोई देश इस देश से रिश्ते तोड़ भी दे, तो भी यह बात नहीं बदलेगी। यह फैसला बिना सलाह-मशविरा किए लिया गया। बहुत नादानी। बहुत नासमझी। हमारा स्टैंड नहीं बदलेगा। हम पहले मालदीव की पॉलिसी के साथ आगे बढ़ेंगे।”
मुइज्जू ने चागोस पर पलटा मालदीव का फैसला
मुइज्जू ने इन बयानों के बावजूद बिना कोई सलाह मशविरा किए चागोस द्वीपसमूह को लेकर देश के आधिकारिक रुख को बदल दिया। उन्होंने पुराने सीमा निर्धारण को खारिज कर दिया और मालदीव की नौसेना को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस द्वारा मॉरीशस को दिए गए इलाके पर कब्जा करने का आदेश दिया। इसके बाद मालदीव की नौसेना के कई युद्धपोत चागोस द्वीपसमूह के आसपास देखे गए हैं। उन्होंने मॉरीशस की मछली पकड़े वाली नौकाओं को भी परेशान किया है।
मुइज्जू ने चागोस पर ठोका मालदीव का दावा
5 फरवरी को मुइज्जू ने ऐलान किया था कि मालदीव, मॉरीशस के साथ सीमा तय करने के अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को नहीं मानेगा। उन्होंने मालदीव की संसद में भाषण देते हुए कहा, “मैरीटाइम एरियाज एक्ट में आइलैंड बेस पॉइंट्स का जिक्र करते हुए कहा, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि SEZ वह एरिया है जो कानून में पहले से तय है, जिसमें तय किया गया मरीन एरिया भी शामिल है और मैं इसे आप माननीय पार्लियामेंट मेंबर्स के सामने ऐलान करता हूं।”
चागोस द्वीपसमूह क्या है?
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित है। यह मॉरीशस का हिस्सा है, जिस पर लंबे समय से ब्रिटेन का अधिकार था। ब्रिटेन ने पिछले साल इस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने का ऐलान किया था। हालांकि, चागोस द्वीपसमूह में ब्रिटेन और अमेरिका का मिलिट्री बेस बना रहेगा और उनके ऑपरेशन पर मॉरीशस कोई आपत्ति नहीं जताएगा। ब्रिटेन ने यह कदम 2021 में इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सीज (ITLOS) के फैसले के बाद उठाया था, जिसमें कहा गया था कि चागोस द्वीपसमूह पर ब्रिटेन का कोई अधिकार नहीं है। उस समय, ITLOS ने मालदीव के दक्षिण में बॉर्डर भी तय किया था।














