तस्करी पर सख्त कार्रवाई करेगा तालिबान
अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कयूम नासिर ने तालिबान से जुड़े एक आउटलेट रेडियो उम्मीद को बताया कि यह फैसला सोमवार से लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्मगलिंग रूट से सामान की आवाजाही पर भी रोक लगाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई पाकिस्तान से दवाओं की तस्करी में शामिल होते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर मुकदमा चलाया जाएगा, और जब्त किए गए सामान को नष्ट कर दिया जाएगा।
अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय का अल्टीमेटम खत्म
मंत्रालय ने पहले व्यापारियों को सूचित किया था कि उनके पास पाकिस्तान से जुड़े कमर्शियल लेनदेन और व्यापार डॉक्यूमेंटेशन को खत्म करने के लिए 19 दिन हैं। यह फैसला महीनों के राजनीतिक तनाव, पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच सीमा पर झड़पों और प्रमुख ट्रांजिट रूट बंद होने के बाद आया है। सितंबर से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पार करने के रास्ते काफी हद तक बंद हैं।
अब्दुल गनी बरादर ने दी थी चेतावनी
तालिबान के आर्थिक मामलों के उप प्रधान मंत्री अब्दुल गनी बरादर ने पहले व्यापारियों से पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबित करने और वैकल्पिक व्यापार गलियारों की पहचान करने का आग्रह किया था। इंपोर्ट पर रोक का असर पहले ही अफगानिस्तान के फार्मास्युटिकल बाजार पर पड़ चुका है। व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि काबुल में कई दवाओं की कमी हो गई है, साथ ही कीमतें भी बढ़ गई हैं। अफगानिस्तान की 70 प्रतिशत से ज़्यादा दवाएं पहले पाकिस्तान से इंपोर्ट की जाती थीं।
भारत बनेगा अफगानिस्तान का सहारा
भारत पूरी दुनिया में दवाओं के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। ऐसे में अफगानिस्तान की नजर भारत से दवाओं के आयात को बढ़ाने पर है। इसके लिए अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली ने 16 से 21 दिसंबर 2025 तक भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी और अफगानिस्तान को दवाओं के निर्यात पर भी बात की थी। भारत ने अफगानिस्तान को हर संभव मदद का भरोसा दिया था और कैंसर की दवाओं और टीकों का एक प्रतीकात्मक हस्तांतरण किया।














