आपस में ही विवाद सुलझाएगी सरकार
आपसी वित्तीय विवादों के निपटारे के लिए बनाए जा रहे नए फ्रेमवर्क को इसी हफ्ते कैबिनेट सचिवालय ने मंजूरी दी है और इसे अन्य मंत्रालयों के साथ साझा भी किया जा चुका है। उम्मीद है कि इससे सरकारी संस्थानों और सरकारी कंपनियों का विवाद आसानी से सुलझेगा, अदालतों पर भी बोझ घटेगा और जनता के खजाने पर दबाव भी कम होगा। वैसे अधिकारियों के मुताबिक इनकम टैक्स, कस्टम और रेलवे से जुड़े मामलों को इस नई व्यवस्था से दूर रखा जा रहा है।
विवादों में कैबिनेट सचिव का फैसला अंतिम
अगर तय किए गए पैनल से विवाद का समाधान नहीं होता है, तो मामला कैबिनेट सचिव के पास जाएगा और उनका फैसला इस मामले में अंतिम माना जाएगा। मतलब, इसके आगे अपील की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘जब विभागों के अंदर ही विवादों का आसानी से समाधान हो सकता है तो कोर्ट में भीड़ क्यों लगाना और मामले को महीनों तक क्यों खींचना।’ इससे विवादों का जल्द समाधान भी मिलेगा और विभागों और मंत्रालयों का उत्तरदायित्व भी बढ़ेगा।
टाइफ्रेम में काम करेगा केंद्र सरकार का पैनल
फरवरी 2025 में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया था कि अदालतों में लंबित मामलों में करीब 7,00,000 केस में केंद्र सरकार पार्टी है। इनमें से भी अकेले 2,00,000 मामलों में वित्त मंत्रालय वादी है। अब जो पैनल बनाए जा रहे हैं, उनके लिए समय-सीमा की पाबंदी जरूरी होगी। मंत्रालयों की ओर से विवादों को 30 तीनों के भीतर पैनल को भेजना होगा, जिसे तीन महीने के भीतर फैसला देना है और उसका जो भी फैसला होगा, उसे महीने भर के अंदर तामील करनी होगी। इस प्रक्रिया की प्रगति को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा और एक रिपोर्ट हर महीने कैबिनेट को भेजी जाएगी। सरकारी संस्थानों से कहा गया है कि जो भी विवाद लंबित हैं, उन्हें 31 मार्च तक वापस ले लें और नई व्यवस्था के तहत समाधान की कोशिश में जुट जाएं।














