टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक NHAI ने ऐसी 424 जगहों की पहचान की है, जिन्हें टेलीकॉम ब्लैक स्पॉट कहा गया है। ये करीब 1,750 किमी तक फैली हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक NHAI के चेयरमैन सतीश कुमार यादव ने TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी को इस बारे में एक चिट्ठी लिखी है। उन्होंने बताया कि मोबाइल नेटवर्क की कमी से हाईवे ऑपरेशन, फील्ड यूनिट्स और सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाने में परेशानी हो रही है।
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मोबाइल टावर की समस्या
अधिकारियों का कहना है कि नए बने हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खासकर दूर-दराज के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या ज्यादा है। दिल्ली-मुंबई और बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में भी यह दिक्कत है। उदाहरण के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर रतलाम के पास के तीन हिस्सों (लगभग 69 किमी) में बिल्कुल भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इसी तरह, मध्य प्रदेश में हरदा और बैतूल के बीच का पूरा 51 किमी का हिस्सा मोबाइल नेटवर्क से बाहर है।
जिन जगहों पर मोबाइल नेटवर्क गायब है, उनमें बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे का करीब 15 किमी हिस्सा, तमिलनाडु में तांबरम-तिरुवल्लूर सेक्शन पर 17 किमी हिस्सा, आंध्र प्रदेश में वारंगल-खम्मम सेक्शन का 11.8 किमी हिस्सा और मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर ठाणे का 10.8 किमी हिस्सा शामिल है। NHAI ने साथ ही हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं के कारण दुर्घटना संभावित 1,665 जगहों की भी पहचान की है।
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अलर्ट भेजने का सुझाव
अधिकारियों ने बताया कि इस बारे में भी TRAI से बात की गई है। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन दुर्घटना संभावित जगहों के बारे में यात्रियों को SMS और फ्लैश SMS अलर्ट भेजे जाएं। एक अधिकारी ने बताया, “इन अलर्ट का मकसद यात्रियों को ऐसी जगहों पर पहुंचने से करीब 15 मिनट पहले सूचित करना है। NHAI ने TRAI से मोबाइल कंपनियों को ये अलर्ट मुफ्त में भेजने का निर्देश देने का आग्रह किया है, ताकि सड़क पर चलने वाले लोगों की जान बचाई जा सके। इससे कई जानें बचेंगी।”












