सीतारमण ने कहा कि फाइनेंशियल सेक्टर में भारतीय बैंकिंग सेक्टर आज काफी बेहतर स्थिति में है। बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत है, मुनाफा ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा है, एसेट क्वालिटी में सुधार हो रहा है और कवरेज 98 फीसदी से अधिक है। इस सेक्टर को अब और आगे ले जाने की जरूरत है। उसके लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे। विकसित भारत के लिए हाई-लेवल कमेटी की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि समिति बैंकिंग सिस्टम के स्ट्रक्चर, एफिशियंसी और तैयारियों की समीक्षा करेगी और इसे अगले चरण के आर्थिक विस्तार को मुताबिक तैयार किया जाएगा।
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क्या है प्रस्ताव?
इस दौरान वित्त मंत्री ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज यानी एनबीएफसी के लिए विकसित भारत विजन के मुताबिक क्लीयर रोडमैप की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने खासकर पब्लिक सेक्टर की एनबीएफसी के लिए क्रेडिट डिसबर्समेंट और टेक्नोलॉजी एडॉप्शन के लिए खास टारगेट सेट किए हैं। सीतारमण ने कहा कि पब्लिक सेक्टर की एनबीएफसी में स्केल हासिल करने और एफिशियंसी सुधारने के लिए पहले कदम के तौर पर एनबीएफसी को पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन में रिस्ट्रक्चर करने का प्रस्ताव है।
माना जा रहा है कि इससे भारतीय बैंकों की प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी और दुनिया में उनका दबदबा बढ़ेगा। अभी भारत का कोई भी बैंक अभी मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की टॉप 100 कंपनियों में शामिल नहीं है। लेकिन इसमें चीन के कई बैंक शामिल हैं। इनमें आईसीबीसी (371.25 अरब डॉलर), एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना (338.37 अरब डॉलर) और चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक (328.20 अरब डॉलर) शामिल हैं। हालांकि एसेट्स के हिसाब से देखें तो भारत के दो बैंक दुनिया के टॉप 10 बैंकों में शामिल हैं।













