यह कदम भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देने के लिए उठाया गया है। आजकल स्टार्टअप्स को रिसर्च और डेवलपमेंट में ज्यादा समय लगता है। उन्हें ज्यादा पैसा भी चाहिए होता है और कमाई शुरू होने में भी देर लगती है। खासकर डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च पर आधारित क्षेत्रों में ऐसा देखा जा रहा है। अब तक करीब दो लाख कंपनियों को स्टार्टअप के तौर पर मान्यता मिल चुकी है। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के तहत इनकम टैक्स में छूट जैसे कई फायदे मिलते हैं।
डीप टेक, AI और कोऑपरेटिव्स… क्या बढ़ेगा स्टार्टअप की परिभाषा का दायरा? बजट में हो सकता है ऐलान
DPIIT ने जारी किया नोटिफिकेशन
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के एक नोटिफिकेशन के अनुसार, स्टार्टअप की पहचान के लिए टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दी गई है। साथ ही, डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए नए नियम भी बनाए गए हैं। डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए सरकार ने उनकी उम्र और टर्नओवर की सीमा को काफी बढ़ा दिया है।
क्या हुए नियमों में बदलाव?
- कंपनी के बनने या रजिस्टर होने के 10 साल के बजाय अब 20 साल तक डीप टेक स्टार्टअप माना जाएगा।
- टर्नओवर की सीमा 300 करोड़ रुपये तक कर दी गई है।
- डीपीआईआईटी ने कहा है कि यह कदम उन डीप टेक कंपनियों की खास जरूरतों को पूरा करेगा जो लंबे समय तक चलने वाले प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं।
- इन कंपनियों में रिसर्च और डेवलपमेंट पर बहुत ज्यादा खर्च होता है और उन्हें टेक्नोलॉजी विकसित करने में काफी पैसा लगता है।
सहकारी समितियों को भी स्टार्टअप का दर्जा
एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब कुछ सहकारी समितियों (cooperative societies) को भी स्टार्टअप के तौर पर मान्यता दी जाएगी। इससे जमीनी स्तर पर इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत ये सहकारी समितियां शामिल हैं:
- मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर हुई मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज।
- राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के कोऑपरेटिव एक्ट्स के तहत रजिस्टर हुई कोऑपरेटिव सोसाइटीज।
- इस कदम का मकसद खेती, उससे जुड़े दूसरे काम, ग्रामीण उद्योग और समुदाय-आधारित व्यवसायों में नए आइडिया को बढ़ावा देना है।
नियम क्यों बदले गए?
सरकार का कहना है कि पिछले दस सालों में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में बड़े बदलाव आए हैं। कई इनोवेशन पर आधारित कंपनियां अपनी उम्र या टर्नओवर की सीमा पार कर जाती हैं, भले ही वे अभी भी डेवलपमेंट या टेस्टिंग के दौर में हों।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि स्टार्टअप इकोसिस्टम में हो रहे बदलावों और बिजनेस लाइफसाइकिल के अलग-अलग पड़ावों पर स्टार्टअप्स को खास फायदे पहुंचाने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए, स्टार्टअप के तौर पर पहचान के लिए टर्नओवर की सीमा 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह फैसला स्टार्टअप इकोसिस्टम के कई लोगों और अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से बातचीत के बाद लिया गया है।













