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  • अभिषेक शर्मा या तिलक वर्मा का पत्ता कटना तय! जिम्बाब्वे के खिलाफ संजू सैमसन बनेंगे टीम इंडिया के संकटमोचक

    नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 राउंड का अगला मुकाबला अब भारतीय टीम के लिए किसी नॉकआउट से कम नहीं रह गया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में होने वाले इस मैच में टीम इंडिया कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों और विशेषज्ञों की मानें तो खराब फॉर्म


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    By Azad Hind Desk फरवरी 25, 2026
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    नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 राउंड का अगला मुकाबला अब भारतीय टीम के लिए किसी नॉकआउट से कम नहीं रह गया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में होने वाले इस मैच में टीम इंडिया कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। सूत्रों और विशेषज्ञों की मानें तो खराब फॉर्म से जूझ रहे अभिषेक शर्मा या तिलक वर्मा में से किसी एक की जगह अब संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका मिलना लगभग तय है।

    क्यों जरूरी है अभिषेक शर्मा को बाहर करना?

    अभिषेक शर्मा ने टूर्नामेंट में अब तक काफी इंटेंट दिखाया है, लेकिन हाई-वोल्टेज मैचों में केवल इंटेंट काफी नहीं होता। साउथ अफ्रीका के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच में भी वह सस्ते में आउट हो गए, जिससे टीम का पूरा दबाव मध्यक्रम पर आ गया। चेन्नई की पिच पारंपरिक रूप से उन बल्लेबाजों को रास आती है जो पारी को संवारना जानते हैं, स्पिन को बेहतर खेलते हैं और स्ट्राइक रोटेट करने में माहिर हैं। अभिषेक की तुलना में संजू सैमसन इन पैमानों पर कहीं ज्यादा अनुभवी नजर आते हैं।

    संजू सैमसन को लेकर बैटिंग कोच का बड़ा ऐलान

    संजू सैमसन को इस वर्ल्ड कप में अब तक ज्यादा मौके नहीं मिले हैं, लेकिन वे ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी समय मैच का पासा पलट सकते हैं। संजू सैमसन को लेकर टीम इंडिया के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने कहा कि ‘संजू सैमसन को साथ कल के लिए बातचीत चल रही है।’ ऐसे में चेपॉक की स्पिन-फ्रेंडली पिच पर संजू की बल्लेबाजी तकनीक भारत के लिए वरदान साबित हो सकती है। वह न केवल जरूरत पड़ने पर एंकर की भूमिका निभा सकते हैं, बल्कि लक्ष्य का पीछा करते समय मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहकर पारी को फिनिश भी कर सकते हैं।

    रणनीतिक बदलाव या दबाव का फैसला?

    जिम्बाब्वे के खिलाफ यह बदलाव केवल फॉर्म की वजह से नहीं, बल्कि टीम संतुलन के लिए भी जरूरी है। अगर भारत पहले बल्लेबाजी करता है, तो संजू परिस्थितियों के हिसाब से गियर बदलने की काबिलियत रखते हैं। वहीं, लक्ष्य का पीछा करते समय मध्य ओवरों में जिम्बाब्वे के स्पिनरों को टैकल करने के लिए सैमसन का अनुभव काम आएगा। यह अभिषेक के प्रति कड़ा फैसला नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए एक स्ट्रेटेजिक मूव माना जा रहा है।

    सेमीफाइनल का समीकरण और नेट रन रेट

    भारत अब किसी और गलती की गुंजाइश नहीं रख सकता। सेमीफाइनल की योग्यता के लिए केवल जीत ही काफी नहीं, बल्कि नेट रन रेट (NRR) को भी सुरक्षित रखना होगा। एक मजबूत बल्लेबाजी प्रदर्शन ही भारत की राह आसान कर सकता है। चेन्नई के घरेलू मैदान पर संजू के पास अपनी छाप छोड़ने और टीम को संकट से निकालने का यह सबसे बड़ा मौका है।

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