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  • अमीर आरोपियों की कानून को चुनौती देने वाली पैंतरेबाजी नहीं चलेगी- CJI सूर्यकांत की बेंच

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अमीर आरोपियों की ओर से नई तरह की याचिकाएं लगाए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर नाराजगी जताई है, जिसमें धनी आरोपी उन कानूनों को चुनौती देने लगे हैं, जिनके


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    By Azad Hind Desk जनवरी 7, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने अमीर आरोपियों की ओर से नई तरह की याचिकाएं लगाए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर बहुत ही सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर नाराजगी जताई है, जिसमें धनी आरोपी उन कानूनों को चुनौती देने लगे हैं, जिनके आधार पर उनपर मुकदमा चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में यह मौखिक टिप्पणी भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की अदालत ने की है।

    अमीर आरोपियों पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट में 3,600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी चॉपर घोटाले (अगस्ता वेस्टलैंड स्कैम)में सुनवाई हो रही थी। इसमें सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच में आरोपी गौतम खेतान के वकील की ओर से दायर याचिकाओं के पक्ष में दलीलें दी जा रही थीं। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट सिर्फ इसलिए ऐसे आरोपियों की विशेष सुनवाई की अर्जी नहीं सुनेगा, क्योंकि वह वित्तीय रूप से सक्षम होने की वजह से सीधे सर्वोच्च अदालत में पहुंच सकते हैं।

    कानून को चुनौती देने की प्रवृत्ति पर नाराज

    सीजेआई की बेंच ने साफ कहा कि अब अदालत ऐसी याचिकाओं को गंभीरता से लेगी। उन्होंने कहा कि सिर्फ इसलिए कि कोई ‘व्यक्ति संसाधन संपन्न है और उसे असहजता महसूस हो रही है’ क्योंकि कानून उसके खिलाफ हैं, वह सीधे अदालत आकर उन कानूनों की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता। भारत के चीफ जस्टिस ने इस ‘अनोखे प्रचलन’ को गलत बताया और कहा कि धनाढ्य आरोपियों को ‘अन्य नागरिक की तरह ही मुकदमे का सामना करना पड़ेगा’।

    मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है यह मामला

    इससे पहले खेतान के वकील ने बेंच को यह बताने की कोशिश की थी कि खेतान मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA) की एक विशेष धारा ‘धारा 44(1)(सी)’ की वैधता को चुनौती दे रहे हैं। जब बेंच ने याचिका को अलग से सुनवाई से साफ मना कर दिया, तो खेतान के वकील ने गुजारिश की कि इस याचिका को पहले से चल रही याचिकाओं के साथ ही जोड़ दिया जाए। इन याचिकाओं में पीएमएलए पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई है, जिसमें इस एक्ट के कई प्रावधानों को सही ठहराया गया था।

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