डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन की सोमवार को टिप्पणी को पढ़ने पर पता चलता है कि स्थितियां कितनी नाजुक हो गई हैं। फ्रेडरिस्कन ने कहा, अगर अमेरिका किसी दूसरे NATO देश पर सैन्य हमला करने का फैसला करता है, तो सब कुछ रुक जाएगा जिसमें नाटो भी शामिल है। इस तरह दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद से जो सुरक्षा बनी हुई है, वह भी खत्म हो जाएगी।
सोवियत नेता भी नहीं डाल पाए थे फूट
नाटो के अंदर मचा यह घमासान पुतिन के लिए खुशखबरी की तरह है। स्टॉकहोम फ्री वर्ल्ड के सीनियर फेलो पैट्रिक ओक्सानन ने कहा, पुतिन के लिए यह बहुत बड़ी जीत है कि हम इस बारे में बात भी कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि गठबंधन के अंदर जो वर्तमान हालात है, वैसा कर पाना कभी सोवियत नेताओं का सबसे बड़ा सपना रही होगी।
ट्रंप के करीबी का यूरोपीय देशों पर तंज
पैट्रिक ने कहा कि हम इसे काफी गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणियों की टाइमिंग का भी जिक्र किया, जो वेनेजुएला पर हमले के ठीक बाद आई हैं। ट्रंप के करीबी सलाहकार स्टीफल मिलर की टिप्पणियों ने इसे और मजबूत किया है। मिलर ने डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया है। मिलर ने कहा था कि ग्रीनलैंड के लिए यूरोप का कोई देश अमेरिका से नहीं लड़ेगा।
मिलर की पत्नी केटी की हालिया सोशल मीडिया ने भी चिंता बढ़ा दी है। उनकी पोस्ट में ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे से ढंका हुआ था, और उस पर ‘जल्द’ लिखा था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सैन्य योजना के विकल्प का मन बना लिया है। इसी सप्ताह वॉइट हाउस ने ग्रीनलैंड को लेकर एक टिप्पणी में कहा था कि अमेरिकी सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति के पास सैन्य इस्तेमाल का विकल्प हमेशा खुला है।
अमेरिका को यूरोप से बाहर निकालने की धमकी
इस बीच ट्रंप की योजना के खिलाफ यूरोप में तीव्र विरोध शुरू हो गया है। फ्रांस के रिटायर्ड जनरल मिशेल याकोवलेफ ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ट्रंप के ग्रीनलैंड वाले कदम की वजह से NATO खत्म हो जाता है, तो यूरोप अमेरिकी सैनिकों को बाहर निकाल देगा। उन्होंने आगे कहा, ‘हम अमेरिका के साथ युद्ध नहीं करेंगे। हमारे पास इसके साधन नहीं हैं। हम उन्हें रामस्टीन से, नेपल्स से निकाल देंगे। भूमध्य सागर में उनका एक भी जहाज नहीं बचेगा।’













