यह निर्यात का आंकड़ा और भी बढ़ेगा क्योंकि पांच साल की पीएलआई योजना की अवधि में अभी तीन महीने बाकी हैं। ऐपल मार्केट कैप के लिहाज से एनवीडिया के बाद दुनिया की दूसरी बड़ी वैल्यूएबल कंपनी है।
एक अधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में ही ऐपल ने लगभग 16 अरब डॉलर का निर्यात किया है। इससे पीएलआई अवधि के दौरान आईफोन का कुल निर्यात 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। ऐपल के बड़े वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों में से एक सैमसंग ने भी पांच साल में लगभग 17 अरब डॉलर के मोबाइल फोन का निर्यात किया। इस बारे में ऐपल और सैमसंग से पीएलआई योजना के तहत निर्यात के आंकड़ों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
भारत में इस आईफोन पर लोगों ने लुटाया सबसे ज्यादा प्यार, 2025 में ऐपल ने बेचीं लगभग 65 लाख यूनिट्स
स्मार्टफोन का निर्यात
फिलहाल, भारत में आईफोन की पांच फैक्ट्रियां हैं। इनमें से तीन टाटा चलाती हैं और दो फॉक्सकॉन। ये फैक्ट्रियां लगभग 45 कंपनियों की सप्लाई चेन का आधार हैं जिनमें कई छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) भी शामिल हैं। ये कंपनियां ऐपल के घरेलू और वैश्विक सप्लाई चेन के लिए पुर्जे बनाती हैं। आईफोन के निर्यात की वजह से स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु बन गया है। 2015 में यह 167वें स्थान पर था। कुल स्मार्टफोन शिपमेंट में ऐपल की हिस्सेदारी 75% है।
स्मार्टफोन पीएलआई योजना मार्च 2025 में समाप्त हो रही है लेकिन सरकार उद्योग को किसी न किसी रूप में समर्थन देना जारी रखना चाहती है। अधिकारियों ने बताया कि उद्योग के साथ मिलकर एक ऐसी योजना बनाई जाएगी जो विनिर्माण को बढ़ावा देने वाले प्रोत्साहन प्रदान करेगी। एक अधिकारी ने कहा, “हम मानते हैं कि चीन और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भारतीय निर्माताओं को अभी भी कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और हम उद्योग को समर्थन देना जारी रखेंगे।”
1900000000000 रुपए बोरियों में भर-भरकर भारत ला रहा ऐपल….चीन की उड़ी नींद, क्या सही होगी वो भविष्यवाणी?
चीन-वियतनाम को एक्सपोर्ट
पीएलआई योजना शुरू होने से पहले भी भारत से मोबाइल फोन का निर्यात होता था लेकिन असली तेजी योजना के शुरू होने के बाद आई है। इसका मुख्य कारण ऐपल का अपने आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाना है। ऐपल के विक्रेताओं और सैमसंग को इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना में चुना गया है। सैमसंग एक डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली बनाएगा, जिससे 300 अतिरिक्त लोगों को रोज़गार मिलेगा।
इसके अलावा ऐपल के ईकोसिस्टम ने फिर से पूरी ताकत दिखाई है। कंपनी के पांच विक्रेताओं को योजना के दूसरे चरण में चुना गया है। बड़े विक्रेताओं में मदरसन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और फॉक्सकॉन शामिल हैं, जो आईफोन के लिए केसिंग बनाएंगे। वहीं, एटीएल लिथियम-आयन सेल बनाएगी और हिंडाल्को एल्यूमीनियम एक्सट्रूजन का काम करेगी। भारत पहली बार चीन और वियतनाम को इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे निर्यात करना शुरू कर रहा है, जिनका उपयोग मैकबुक, एयरपॉड्स, वॉच, पेंसिल और आईफोन जैसे ऐपल उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।











