इसके अलाला अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) एक नई योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन से जुड़े सभी विदेशी यात्रियों के लिए बायोमेट्रिक जांच को और सख्त किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के मुताबिक अब सिर्फ फिंगरप्रिंट और फोटो ही नहीं, बल्कि वॉयसप्रिंट, आईरिस स्कैन, डीएनए, चेहरे की तस्वीरें और अन्य संवेदनशील डेटा भी इकट्ठा किया जाएगा। यानि एयरपोर्ट पर कई घंटे और लगेंगे।
अमेरिका में विदेशी यात्रियों की जांच और सख्त होगी
नये नियम के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय छात्र, विदेशी कामगार और पर्यटक, हर किसी को अमेरिका में आते समय और जाते समय फोटो खिंचवाना अनिवार्य होगा। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और इमिग्रेशन सिस्टम में धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया जा रहा है। इस सख्ती का असर जमीनी स्तर पर काफी ज्यादा बड़ा है। ज्यादातर यात्री बार-बार अतिरिक्त जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, भले ही उनके पास वैध वीजा और दस्तावेज मौजूद हों। कुछ मामलों में यात्रियों को बोर्डिंग से रोका गया है। DHS का कहना है कि अतिरिक्त स्क्रीनिंग हमेशा कानून प्रवर्तन डेटाबेस से जुड़ी नहीं होती, बल्कि कई बार यात्रा के पैटर्न, रैंडम सिलेक्शन या अन्य परिस्थितियों की वजह से भी हो सकता है। लेकिन यात्रियों में अमेरिका जाने को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
हालांकि ऐसे यात्रियों के लिए DHS ने Travel Redress Inquiry Program (DHS TRIP) को एक समाधान के तौर पर पेश किया है। यह उन लोगों के लिए एक सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट है, जिन्हें लगता है कि उन्हें गलत तरीके से रोका गया है, या उनकी जांच में देरी हो रही है या फिर अतिरिक्त जांच के लिए उन्हें बिठाया गया है। बार-बार सेकेंडरी स्क्रीनिंग झेलने वाले यात्री DHS TRIP के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और DHS सिस्टम में मौजूद गलत जानकारी को सुधारने का अनुरोध कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीजा के लिए आवेदन करते समय यात्रा की तारीख, स्थान, पासपोर्ट की जानकारी और संबंधित घटनाओं की पूरी जानकारी दी जाए और कुछ भी गलती ना हो।














