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  • अमेरिका को ठेंगा और चीन को टक्कर, 2030 तक भारत का ‘टेक सुपरपावर’ बनने का महाप्लान तैयार, जानें खास बातें

    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ऐतिहासिक डील के चलते हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा होने वाला है। ‘Towards 2030’ नाम का यह एजेंडा सिर्फ एक समझौता नहीं बल्कि भारत को दुनिया का टेक हब बनाने का एक नक्शा या कहें कि ब्लूप्रिंट है। एक तरफ जहां दुनिया उथल-पुथल के दौर से


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    By Azad Hind Desk जनवरी 28, 2026
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    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ऐतिहासिक डील के चलते हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा होने वाला है। ‘Towards 2030’ नाम का यह एजेंडा सिर्फ एक समझौता नहीं बल्कि भारत को दुनिया का टेक हब बनाने का एक नक्शा या कहें कि ब्लूप्रिंट है। एक तरफ जहां दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, वहीं भारत और यूरोप ने मिलकर तरक्की, सुरक्षा और इनोवेशन का एक नया रास्ता चुना है। यह डील न सिर्फ भारत को दुनिया की टेक राजधानी बनाने में मदद करेगी बल्कि रोजगार और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान दिलाने का बड़ा मंच भी उपलब्ध कराएगी। चलिए डिटेल में समझते हैं इस महाप्लान का सार।

    दुनिया मानेगी भारत की डिजिटल ताकत का लोहा

    द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप के साथ हो रही महाडील की खास बात है कि इसका सबसे अहम हिस्सा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से संबंधित है। दरअसल अब भारत और यूरोपीय संघ मिलकर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और 6G जैसी तकनीक पर काम करेंगे। इसकी सबसे खास बात है कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को यूरोप भी अपनाएगा। इस महाडील की चलते यूरोप और भारत मिलकर एक सुरक्षित डिजिटल ईको सिस्टम बनाएंगे, जो कि साइबर खतरों से तो सुरक्षित होगा ही साथ में मेड इन इंडिया’ चिप्स और टेलीकॉम टेक्नोलॉजी को ग्लोबल मार्केट में पहचान दिलाएगा।

    अमेरिका को ठेंगा चीन को टक्कर की तैयारी

    इस डील के साथ ही भारत ने न सिर्फ अमेरिका को ठेंगा दिखा दिया है बल्कि चीन को टक्कर देने की भी तैयारी कर ली है। दरअसल आज के समय में सॉफ्टवेयर के साथ-साथ हार्डवेयर भी सुरक्षा के लिए जरूरी है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने यूरोपीय नेताओं के साथ मिलकर आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए काम करने पर जोर दिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की मानें, तो इसकी वजह से आने वाले समय में जरूरी सामान और टेक्नोलॉजी के लिए भारत को चीन पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। यूरोप और भारत रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित करेंगे जिससे देश और डेटा दोनों ही पूरी तरह से सुरक्षित रहें। सुरक्षा और डिफेंस पर काम करके भारत अपनी सैन्य और टेक्निकल ताकत को यूरोप के एडवांस रिसोर्सेज के साथ जोड़ पाएगा।

    युवाओं के लिए नए अवसर: स्किलिंग और ग्लोबल बिजनेस

    रिपोर्ट के अनुसार, इस डील का फायदा सिर्फ सरकारों तक ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी काफी प्रभावित करेगा। इस डील की वजह से आने वाले समय में भारतीय युवाओं के लिए यूरोप में काम करने, पढ़ाई करने और बिजनेस करने के रास्ते और भी आसान होंगे। बता दें कि इस महाडील में स्किल्स और मोबीलिटी पर खास ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारतीय प्रोफेशनल्स अपनी प्रतिभा वैश्विक स्तर पर दिखा पाएंगे। 2026 में ब्रुसेल्स में होने वाली अगली ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की बैठक यूरोप और भारत की दोस्ती को और मजबूत करेगी।

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