दरअसल, इसकी वजह है कि चीन ईरान से बहुत बड़े पैमाने पर सस्ता तेल खरीदता है। यही नहीं ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज चीन के लिए नया मलक्का स्ट्रेट बन सकता है जो शी जिनपिंग की दुखती रग है। होर्मुज जलडमरू मध्य पश्चिम एशिया में एक जलसंधि है जो ईरान के दक्षिण में फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से अलग करता है। चीन दुनिया की फैक्ट्री बन चुका है। चीन की इस सफलता में फारस की खाड़ी तक उसकी आसान पहुंच और वहां पर स्थिरता का बहुत बड़ा योगदान है। चीन दुनिया का सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला देश है।
चीन का सीपीईसी प्लान फेल!
चीन को अब तक डर सताता रहता था कि भारत और अमेरिका इंडोनेशिया के पास मलक्का स्ट्रेट में उसकी तेल और सामानों की सप्लाई को समुद्र में रोक सकते हैं। चीन के कुल व्यापार का बहुत बड़ा हिस्सा मलक्का स्ट्रेट के रास्ते से होता है। इसी वजह से चीन पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर खर्च करके चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर बना रहा है। चीन चाहता है कि ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देशों से तेल और अन्य जरूरी सामान सीधे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के रास्ते जमीनी और रेलमार्ग से बीजिंग पहुंच जाए। अमेरिका अगर ईरान पर हमला करता है तो चीन की यह चाल फेल हो जाएगी।
ईरान में अगर अमेरिका हमला करके सत्ता बदलने में सफल हो जाता है तो चीन को तेहरान से सस्ता तेल मिलना बंद हो जाएगा। चीन को दो अमेरिका विरोधी देशों ईरान और वेनेजुएला से बहुत ही सस्ता तेल मिलता रहा है। अब वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का कब्जा हो गया है। ईरान पर अमेरिका के हमले का खतरा मंडरा रहा है। इसी वजह से चीन में डर का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय आंकड़े के मुताबिक चीन ने साल 2025 के अंतिम दिनों तक 13.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया था। चीन लगातार रीनूबल एनर्जी का उत्पादन तेजी से बढ़ा रहा है लेकिन उसके पेट्रो केमिकल और हैवी ट्रांसपोर्ट सेक्टर को अब भी बहुत ही ज्यादा तेल की जरूरत है।
चीन को मलक्का स्ट्रेट से ज्यादा बड़ा खतरा
चीन की सेना ने अब तक खुद को मल्लका संकट के लिए तैयार किया है। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मलक्का स्ट्रेट के मुकाबले ज्यादा चिंताजनक जगह है। चीन का 50 फीसदी तेल फारस की खाड़ी से आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के देश पाइपलाइन जैसे वैकल्पिक साधनों की मदद से चोक प्वाइंट से बच जाते हैं लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल के निकालने का स्थान है। इस भूगोल की वजह से तेल निकालने वाले देशों को जहां बाजारों की जरूरत है ताकि उनकी आय हो वहीं उपभोक्ता देशों को उद्योगों को सप्लाई को बनाए रखने के लिए सुरक्षा की जरूरत होती है।
भारत तक आएगा असर
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर फारस की खाड़ी में जंग छिड़ती है तो इसका असर भारत और यूरोप तक आएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक जगह पर मात्र 33 किमी चौड़ा है। इसमें भी जहाजों के सफर करने लायक रास्ता मात्र 10 किमी है। इसमें 3 किमी के इलाके में जहाजों के आने और 3 किमी के इलाके में जहाजों के जाने का रास्ता तय है। इस स्ट्रेट के उत्तरी तरफ के इलाके पर ईरान का नियंत्रण है। ईरान यहां आने वाले ट्रैफिक पर पूरी नजर रख सकता है। ईरान यहां पर एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों के जरिए पूरा कंट्रोल स्थापित कर सकता है। यहां पानी की गहराई कम है जिससे नौसैनिक जहाज भी कुछ खास नहीं कर सकते हैं। यहां से हर दिन 21 मिलियन बैरल तेल का निर्यात किया जाता है जो दुनिया के कुल खपत का 20 फीसदी है। यहां से 90 मिलियन टन एलएनजी की भी सप्लाई भारत समेत पूरी दुनिया को हर साल होती है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयात करने वाला देश है।













