पाकिस्तान की बेइज्जती
हालांकि, अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि रोक के लिए देशों का चयन किस आधार पर किया गया है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि रोक में उन देशों को निशाना बनाया गया है जो धोखाधड़ी के लिए हाई रिस्क समझे जाते हैं। बैन में सोमालिया, अफगानिस्तान, यमन, सीरिया और नाइजारिया जैसे देशों के साथ रखा जाना पाकिस्तान के लिए भारी शर्मिंदगी की वजह है। खास बात है कि जिस दिन इसकी घोषणा की गई उसी दिन पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार से जुड़ी क्रिप्टो फर्म के साथ एक समझौता ज्ञापन पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किया था।
इस लिस्ट में पाकिस्तान का शामिल होना बताता है कि अमेरिकी सरकार आज भी पाकिस्तानी दस्तावेजों की सच्चाई और आपराधिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को लेकर उस पर भरोसा नहीं करती है। CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान रोक अभी केवल इमिग्रेंट वीजा तक ही है, लेकिन ऐसा संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इन 75 देशों के लिए सभी वीजा प्रोसेसिंग पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
भारत कैसे रहा लिस्ट से बाहर?
वहीं, इसके ठीक उलट 75 देशों पर वीजा प्रोसेसिंग रोके जाने वाली लिस्ट में भारत का नाम न होना ट्रंप प्रशासन की नजर में नई दिल्ली की भरोसेमंद पार्टनर की स्थिति को मजबूत करता है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि भारत के स्थापित वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल ने नागरिकों को अमेरिकी कार्रवाई से बचाया है।
एक्सपर्ट इस बात से सहमत है कि भारत को लिस्ट से बाहर रखे जाने का संबंध डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम में अंतर, अमेरिकी इमिग्रेशन स्टैंडर्ड का पालन, आर्थिक संबंध से हो सकता है। इसके साथ ह H-1B जैसे हाई स्किल्ड वीजा कैटेगरी में भारत का दबदबा और अमेरिकी कॉन्सुलर सर्विस के साथ इसका लंबे समय से सहयोग भी बाहर रखे जाने के संभावित कारण हैं।













