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  • अमेरिका में लिखी गई ईरान के इस्लामिक शासन को गिराने की स्क्रिप्ट? प्रिंस ने बताया तख्‍तापलट का प्लान

    तेहरान: ईरान में महंगाई, बेरोजगारी के साथ साथ इस्लामिक सरकार के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से भारी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में फैल गया है। इस बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुले तौर पर धन्यवाद दिया


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    By Azad Hind Desk जनवरी 3, 2026
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    तेहरान: ईरान में महंगाई, बेरोजगारी के साथ साथ इस्लामिक सरकार के खिलाफ पिछले एक हफ्ते से भारी विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन देश के कई हिस्सों में फैल गया है। इस बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुले तौर पर धन्यवाद दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान की इस्लामिक सरकार, प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाती है, तो अमेरिका बीच में आ जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए रजा पहलवी ने लिखा है कि “उनके पास एक “स्थिर बदलाव” की योजना है, अगर इस्लामिक रिपब्लिक शासन गिर जाता है और देश के लाखों नागरिक सड़कों पर उतर आते हैं।”

    क्राउन प्रिंस ने डोनाल्ड ट्रंप को लेकर आगे कहा है कि “आपने इस्लामिक रिपब्लिक के आपराधिक नेताओं को जो चेतावनी दी है, उससे मेरे लोगों को ज्यादा ताक़त और उम्मीद मिली है, यह उम्मीद कि आखिरकार, यूनाइटेड स्टेट्स का कोई राष्ट्रपति मजबूती से उनके साथ खड़ा है।” ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें हिंसक रूप से मारता है” तो अमेरिका ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों की “मदद के लिए आएगा” और ऐसी स्थिति में अमेरिका “पूरी तरह तैयार है।”

    ईरान में इस्लामिक सरकार पतन की तरफ?
    रजा पहलवी ने अपनी पोस्ट में कहा कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी “अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं” और “मुझे एक जिम्मेदारी और एक संदेश के साथ भेज रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच वैसे रिश्ते फिर से कायम करना, जो कभी थे और जिसने मिडिल ईस्ट में शांति और खुशहाली लाई थी।” पहलवी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक शासन गिर जाता है, तो उनके पास “स्थिर बदलाव” के लिए एक प्लान है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें “अपने लोगों का समर्थन” प्राप्त है। पहलवी ने अपने एक्स अकाउंट पर फारसी में ईरानियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक “तेहरान में लोगों को इकट्ठा होने से रोकने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह अच्छी तरह जानता है कि तेहरान और दूसरे बड़े शहरों की सड़कों पर कब्ज़ा करने से उसका पतन तेजी से होगा।

    ईरान में इस्लामिक शासन के तख्तापलट की आहट

    • ईरान में 1979 से पहले शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन था, जिन्हें अमेरिका का समर्थन हासल था।
    • रजा पहलवी शाह की तानाशाही, भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों के खिलाफ ईरान में भयानक प्रदर्शन किया गया।
    • कट्टर इस्लामिक नेता आयतुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी शाह, उस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरे।
    • ईरान की मस्जिदों में खुमैनी के भाषण दिखाए जाते थे, उनके भाषण के कैसेट भी जनता में बांटे जाते थे।
    • साल 1978–79 में देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हड़तालें शुरू हो गईं।
    • जनवरी 1979 में शाह रजा पहलवी को ईरान छोड़कर भागना पड़ा।
    • फरवरी 1979 में आयतुल्ला खुमैनी ईरान लौटे और इस्लामिक सरकार का गठन किया।
    • अप्रैल 1979 में हुए जनमत-संग्रह में ईरान को “इस्लामिक रिपब्लिक” घोषित कर दिया गया।
    • इसके बाद ईरान एक कट्टर इस्लामिक देश में बदल गया, जहां महिलाओं के ज्यादातर अधिकार खत्म कर दिए गये।

    उन्होंने आगे कहा कि “शासन के दमन का सामना करने के लिए हमारे सामने एक ही रास्ता है, पूरे शहर में लोगों की एक साथ और बड़ी संख्या में मौजूदगी। साथ ही, मुख्य रास्तों और सड़कों पर नाकाबंदी करना।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील करते हुए कहा कि “इसे हासिल करने के लिए, सबसे पहले हमें अपने डर पर काबू पाना होगा और यह समझना होगा कि अगर हम सड़कों पर उतरते हैं, तो शासन हम पर दमन करने की अपनी क्षमता और इच्छाशक्ति जल्दी खो देगा।” उन्होंने आगे लिखा कि “इसका समाधान यह है कि दोस्तों और परिवार के सदस्यों के छोटे और एकजुट समूहों में, अपने घर के पास की सड़क पर जाएं, एक-दूसरे के साथ आएं और फिर, हाथ में हाथ डालकर शहर की मुख्य सड़कों की ओर बढ़ें।”

    क्या ईरान पर हमला करेगा अमेरिका?
    डोनाल्ड ट्रंप के बयान से लगता है जैसे अमेरिका में ईरान के इस्लामिक शासन को गिराने की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। ईरान की सरकार प्रदर्शन को बेरहमी से कुचलती है, इसीलिए अगर प्रदर्शन बढ़ता है तो फिर से लोग मारे जाएंगे। इस बीच रजा पहलवी ने अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन को भी धन्यवाद दिया है, जिन्होंने कहा कि वह “राष्ट्रपति ट्रंप के अयातुल्लाओं के खिलाफ मजबूत रुख का समर्थन करते हैं, जिन्होंने अपने ही लोगों को सताया है, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने 47 सालों से अमेरिकियों को मारा है।” अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने जवाब देते हुए कहा कि ट्रंप की पोस्ट से “बहुत जरूरी नैतिक और रणनीतिक स्पष्टता” मिली है।

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