RBI के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 के अंत तक केंद्रीय बैंक के पास 880.18 मीट्रिक टन सोना था, जो एक साल पहले 866.8 मीट्रिक टन था। इसी समय के दौरान, विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 685 अरब डॉलर पर स्थिर बना रहा। आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका के ट्रेजरी बॉन्ड में यूनाइटेड किंगडम, बेल्जियम, जापान, फ्रांस, कनाडा और यूएई जैसे देशों ने अपना निवेश बढ़ाया है। दूसरी ओर चीन, ब्राजील, भारत, हांगकांग और सऊदी अरब ने साल-दर-साल अपने निवेश को कम किया है।
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सोने का भंडार
26 सितंबर तक RBI के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 13.6% था। पिछले साल इसी समय यह 9.3% था जब कुल भंडार रेकॉर्ड स्तर पर था। दुनिया भर में केंद्रीय बैंक सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद अपने भंडार में सोना जोड़ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी रणनीति बदली है। अब वे डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
IDFC फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा, ‘अमेरिका के ट्रेजरी बिलों में भारत की कम हिस्सेदारी RBI की सोने की खरीद बढ़ाकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने की कोशिश को दर्शाती है। विकसित देशों में बढ़ते वित्तीय दबावों ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया है, जिससे ट्रेजरी में रखे गए भंडार के मूल्यांकन में नुकसान का जोखिम बढ़ गया है। इस जोखिम को सीमित करने के लिए, RBI सहित केंद्रीय बैंक अपने भंडार का कुछ हिस्सा अमेरिकी ट्रेजरी से हटाकर सोने की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।’
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किसका है सबसे ज्यादा निवेश?
अक्टूबर 2025 के अंत तक, केंद्रीय बैंकों द्वारा अमेरिकी ट्रेजरी बिलों में कुल निवेश 9.24 ट्रिलियन डॉलर था। इसमें जापान का निवेश सबसे अधिक 1.2 ट्रिलियन डॉलर था, इसके बाद यूके (877 अरब डॉलर) और चीन (688.7 अरब डॉलर) का स्थान था। पिछले साल अक्तूबर के अंत में चीन का निवेश 760.1 अरब डॉलर था। इस दौरान ब्राजील का निवेश 228.8 अरब डॉलर से घटकर 167.7 अरब डॉलर रह गया है।












