पिछले साल अगस्त में भारत और अमेरिका के रिश्तों में तब खटास आ गई थी, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। इस टैरिफ से नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है और भारत की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को भी ठेस पहुंची है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस दबाव के कारण ही भारत अपने सबसे बड़े बाजार अमेरिका से आगे बढ़कर अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने पर मजबूर हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप को मोदी का फोन करना नहीं, ट्रेड डील न होने की ये है असली वजह, बौखलाया अमेरिका
पिछले साल लगाया चौका
भारत ने पिछले साल चार व्यापार समझौते किए या उन्हें लागू किया। इनमें ब्रिटेन के साथ एक बड़ा समझौता भी शामिल है। यह पिछले कई सालों में सबसे तेजी से हुए समझौतों में से एक है। अब भारत नए समझौतों की ओर भी देख रहा है। यूरोपीय संघ (EU), यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, मेक्सिको, चिली और दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कूसर (Mercosur) के साथ या तो नए समझौते करने के लिए या मौजूदा समझौतों को बढ़ाने के लिए बातचीत चल रही है।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
नई दिल्ली स्थित ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव का कहना है कि अगर ये बातचीत सफल होती है, तो भारत के लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापारिक समझौते होंगे। श्रीवास्तव के अनुसार, 2025 व्यापार समझौतों के लिए सबसे सक्रिय सालों में से एक रहा है। उनका मानना है कि इन समझौतों का मकसद वाशिंगटन से दूरी बनाना नहीं, बल्कि टैरिफ के असर को कम करना है।
निर्यात के नए रास्ते खोजना जरूरी
अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े टैरिफ का एक कारण भारत का रूस से तेल खरीदना है। अमेरिका का कहना है कि यह तेल खरीद रूस के यूक्रेन पर हमले को बढ़ावा देती है। इसी वजह से भारत अब दूसरे बाजारों को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
व्यापार अर्थशास्त्री बिस्वजीत धर ने एएफपी को बताया, ‘मेरी समझ के अनुसार, यह रणनीति ट्रंप के कदमों की प्रतिक्रिया थी। अब भारत के लिए अपने निर्यात के लिए नए रास्ते खोजना एक जरूरी काम बन गया है।’ बड़े व्यापार समझौते उन उद्योगों के लिए मददगार होंगे जिनमें ज्यादा मजदूरों की जरूरत होती है और जो टैरिफ से प्रभावित हुए हैं।
ब्रिटेन को कपड़ों का दोगुना निर्यात
भारत ने पिछले साल साल 2025 में ब्रिटेन के साथ समझौता किया था। भारत के परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (Apparel Export Promotion Council) का अनुमान है कि ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते से अगले तीन सालों में ब्रिटेन को होने वाले कपड़ों के निर्यात को दोगुना करने में मदद मिल सकती है।
पिछले वित्तीय वर्ष में ओमान और भारत के बीच व्यापार 11 अरब डॉलर से कम था, लेकिन दिसंबर में मस्कट (ओमान की राजधानी) के साथ हुए समझौते से मध्य पूर्व और अफ्रीका के बड़े बाजारों का रास्ता खुलता है। वहीं न्यूजीलैंड के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) हुआ। इस समझौते के तहत भारत में 20 अरब डॉलर का विदेशी निवेश अया।
किन-किन के साथ समझौते?
भारत यूरोपीय संघ के साथ समझौता करने जा रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि यह दुनिया का इस तरह का सबसे बड़ा समझौता होगा। लेयेन के जनवरी में भारत आने की उम्मीद है। दोनों पक्ष स्टील और ऑटो निर्यात से जुड़े विवादों के कारण 2025 के अंत तक बातचीत पूरी करने की समय सीमा चूक गए थे, लेकिन भारतीय वार्ताकार अभी भी आशावादी हैं।
वहीं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज भारत आएंगे और सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। मोदी के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वे व्यापार और निवेश में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत करेंगे।
अमेरिका कितना जरूरी?
नवंबर 2025 में भारत के माल निर्यात में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो अक्टूबर की गिरावट के उलट है। हालांकि इस उछाल में इलेक्ट्रॉनिक्स शिपमेंट का योगदान था। यह अभी भी अमेरिकी टैरिफ से मुक्त हैं। वहीं समुद्री उत्पाद निर्यात में भी वृद्धि देखी गई।
सीफूड एक्सपोर्टर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के के एन राघवन ने कहा कि यूरोपीय संघ और चीन को निर्यात बढ़ा है और ये अमेरिका के बाद शीर्ष बाजार हैं। लेकिन निर्यातक चेतावनी देते हैं कि वैकल्पिक बाजार अमेरिका की जगह पूरी तरह से नहीं ले सकते।













