ट्रंप का बयान गुरुवार को उनकी स्टार्मर के साथ फोन कॉल के बाद आया है जिसमें ट्रंप ने कहा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने ‘सबसे अच्छी डील की, जो वह कर सकते थे।’ लेकिन ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिकी मौजूदगी को खतरा हुआ तो उसे सैन्य रूप से सुरक्षित और मजबूत करने का अधिकार रहेगा।
चागोस द्वीप समूह पर क्यों नाराज हैं ट्रंप?
- ब्रिटेन ने पिछले साल मारीशस के साथ एक समझौते की घोषणा की थी। इसके तहत ब्रिटेन द्वीपों पर नियंत्रण मॉरीशस को सौंप देगा।
- इसके साथ ही सबसे बड़े द्वीप डिएगो गार्सिया को 99 साल के लिए लीज पर लेगा, ताकि वहां संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन मिलिट्री बेस का संचालन रखा जा सके।
- ट्रंप ने कहा था कि वह इस बात के खिलाफ हैं कि ब्रिटेन द्वीपों को लीज पर दे रहा है और बेच रहा है। उन्होंने कहा कि लंदन को इसे अपने पास रखना चाहिए।
डिएगा गार्सिया क्यों है खास?
- डिएगा गार्सिया हिंद महासागर के बीच में स्थित है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सेना के लिए महत्वपूर्ण बेस है। यहां एक गहरे पानी का बंदरगाह है, जहां विमानवाहक पोत रुक सकते हैं।
- इसके साथ ही स्टील्थ बी-2 बमवर्ष जैसे युद्धक विमानों को लॉन्च करने के लिए रनवे है। यह निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- इस बेस ने वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशंस में अहम भूमिका निभाई थी। साल 2008 में अमेरिका ने यह भी माना कि इस बेस का इस्तेमाल आतंकवाद के संदिग्धों को गुप्त रूप से लाने और ले जाने वाली उड़ानों के लिए किया गया था।
- चागोस द्वीप 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में है। 1960 और 1970 के दशक में चागोस द्वीप समूह के करीब 2000 निवासियों को जबरन वहां से हटा दिया गया था और उन्हें मॉरीशस, सेशेल्स और ब्रिटेन में बसाया गया था। ये लोग दशकों के अपनी पैतृक जमीन पर लौटने के लिए अभियान चला रहे हैं।
वॉइट हाउस का आया बयान
वॉइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर की स्थिति को समझते हैं और वह इसका समर्थन करते हैं, लेकिन जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, बेशक अमेरिका अपनी संपत्तियों की रक्षा करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
ब्रिटिश सरकार ने बातचीत के बाद एक बयान दिया और कहा कि स्टार्मर और ट्रंप डिएगो गार्सिया पर संयुक्त यूके-अमेरिका बेस को सुरक्षित रखने के लिए डील के महत्व पर सहमत हुए। दोनों सरकारें बेस के भविष्य की संचालन की गारंटी के लिए मिलकर काम करती रहेंगी और जल्द ही फिर से बात करेंगी।
चागोस डील का ब्रिटेन में विरोध
इस बीच ब्रिटेन की स्टार्मर सरकार को देश के अंदर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कंजर्वेटिव पार्टी ने चागोस द्वीप समूह को लौटाने और लीज पर लेने को भयानक डील बताया है। इसने गुरुवार को चेतावनी दी कि वे संसद में इसका विरोध जारी रखेंगे। प्रीति पटेल ने कहा कि लीज खत्म हो सकती है जिससे हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और हमारे सहयोगियों की सुरक्षा और भी ज्यादा खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा, ‘कंजर्वेटिव पार्टी का रुख नहीं बदला है। हमने इस भयानक आत्मसमर्पण के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया है और हम आखिर तक इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे।’
डील का भारत ने किया है समर्थन
पिछले साल मई में जब ब्रिटेन ने मॉरीशस के साथ चागोस को लेकर डील साइन की तो मॉरीशस के प्रधानमंत्री इसे ऐतिहासिक समझौता बताया था और भारतीय पीएम मोदी को धन्यवाद दिया था। भारत ने चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपे जाने का समर्थन किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत हिंद महासागर में मॉरीशस और दूसरे समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले साल सितम्बर में भारत ने मॉरीशस के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें पोर्ट लुइस में बंदरगाह के पुनर्विकास और चागोस समुद्री संरक्षित क्षेत्र के विकास से जुड़े समझौते शामिल थे।













