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  • अमेरिकी F-35 का भौकाल खत्म! रूस ने Su-57 जेट के लिए बनाया खास इंजन, भारतीय सुखोई के लिए अच्छी खबर

    मॉस्को: रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी इंजन थी। इस वजह से रूस Su-57 को बेच नहीं पा रहा था। लेकिन अब रूस ने अपने विमान की सबसे बड़ी कमजोरी से पार पा लिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का इंजन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट, Product 177 कामयाब


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    मॉस्को: रूस के पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी इंजन थी। इस वजह से रूस Su-57 को बेच नहीं पा रहा था। लेकिन अब रूस ने अपने विमान की सबसे बड़ी कमजोरी से पार पा लिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का इंजन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट, Product 177 कामयाब हो गया है। इससे रूसी फाइटर जेट की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक, नये इंजन के साथ एसयू-57 का ट्रायल भी शुरू हो चुका है। हालांकि इंजन को लेकर अभी भी कई जानकारियां गोपनीय रखी गई हैं, फिर भी कई जानकारियां जो सार्वजनिक हुई हैं, उससे पता चलता है कि एस-57 अब पहले से कई गुना घातक बन चुका है।

    Product 177 को Rostec और उसकी सहायक कंपनी United Engine Corporation (UEC) ने डेवलप किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोडक्ट 177 को खास तौर पर पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए ही तैयार किया गया है और ये एसयू-57 के लिए स्थायी इंजन की तरह काम करेगा। UEC के मुताबिक, Product 177 इंजन 16,000 किलोग्राम-फोर्स (kgf) तक का आफ्टरबर्निंग थ्रस्ट जेनरेट करता है, जिससे ना सिर्फ ऑपरेशन के दौरान कम इंजन की खपत होती है, बल्कि लड़ाकू विमानों की सर्विस लाइफ में भी इजाफा होगा।

    Product 177 इंजन की खासियत क्या है?
    रिपोर्ट के मुताबिक, Product 177 में एडवांस मैटेरियल, एडवांस थर्मल कोटिंग्स और मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। जिससे इसके टर्बाइन इनलेट टेम्परेचर (TET) को सुरक्षित रूप से बढ़ाया जा सका है। इसका सीधा असर थ्रस्ट एफिशिएंसी और स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (SFC) पर दिखेगा और इसमें जबरदस्त सुधार होगा। आसान शब्दों में समझें तो इससे इस लड़ाकू विमान की गतिशीलता और बढ़ेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस इंजन के डेवलपमेंट के साथ रूस अब आगे जाकर इनका इस्तेमाल Su-35, Su-34 और Su-30MKI/SM जैसे विमानों को भी एडवांस बनाने के लिए कर सकता है। भारत के लिए ये एक अच्छी खबर इसलिए है क्योंकि भारत भी Su-30MKI का इस्तेमाल करता है और फिलहाल इस फाइटर जेट के इंजन को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है।

    रणनीति के लिहाज से देखा जाए तो प्रोडक्ट 177 और 177S इंजन प्रोग्राम Su-57 की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। जिससे अब रूस उस मजबूत स्थिति में आ गया है, जहां से वो एसयू-57 लड़ाकू विमानों को बेच सके। अब एसयू-57 लड़ाकू विमान, एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म की तरह दिखने ललगा है। रोस्टेक ने पुष्टि की है कि Su-57 की एक्सपोर्ट डिलीवरी पहले ही शुरू हो चुकी है। प्रोडक्ट 177 सीधे तौर पर इस जरूरत को पूरा करता है, जिससे Su-57E वेरिएंट की मांग अब तेजी से बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि नये इंजन के साथ Su-57M लड़ाकू विमान, बिना आफ्टरबर्नर के Mach 1.8 से 2.0 की लगातार सुपरसोनिक उड़ान भरने में सक्षम होगा, जिससे थर्मल सिग्नेचर कम होगा और मिशन रेंज बढ़ेगी।

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