• National
  • असम चुनाव: प्रियंका गांधी पर कांग्रेस का भरोसा, संगठन को साधने की बड़ी जिम्मेदारी

    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाकर पार्टी के भीतर से उठ रही पुरानी मांग को पूरा किया है। नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता रहा है कि प्रियंका को ज्यादा जिम्मेदारी मिलनी चाहिए और अगर वह जमीनी स्तर पर काम करती हैं, तो पार्टी को


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 5, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रियंका गांधी को स्क्रीनिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाकर पार्टी के भीतर से उठ रही पुरानी मांग को पूरा किया है। नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग मानता रहा है कि प्रियंका को ज्यादा जिम्मेदारी मिलनी चाहिए और अगर वह जमीनी स्तर पर काम करती हैं, तो पार्टी को ज्यादा फायदा होगा।

    असम की अहमियत । असम में इस साल मार्च-अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं। यह उन कुछ राज्यों में से एक है, जहां कांग्रेस संगठन अब भी मजबूत है। राज्य में 10 साल पहले तक कांग्रेस की सरकार थी और आज भी मुख्य विपक्षी ताकत वही है। इस साल अप्रैल-मई तक पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रियंका को असम की जिम्मेदारी मिलना अहम माना जा रहा है।

    पार्टी का भरोसा । प्रियंका भले नवंबर 2024 में पहली बार वायनाड से उपचुनाव के जरिये लोकसभा में पहुंची हों, लेकिन उनका राजनीतिक अनुभव कहीं अधिक है। राहुल गांधी ने जब 2004 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा, तो चुनावी प्रचार की कमान प्रियंका ने ही संभाली थी। उनकी तुलना दादी इंदिरा गांधी से की जाती रही है और कांग्रेस के भीतर यह भरोसा है कि वह अगर पूरी तरह सामने आकर जिम्मा संभालें, तो पार्टी फिर से मजबूत हो सकती है।

    यूपी से अलग । हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले प्रियंका को यूपी में महासचिव बनाया गया था और पूर्वी यूपी के चुनाव अभियान की जिम्मेदारी उन पर थी, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। लेकिन, एक हकीकत यह भी है कि यूपी में कांग्रेस का संगठन बेहद कमजोर स्थिति में था। प्रियंका ने जोश तो भरा, लेकिन उसे परिणाम में बदलने के लिए उनके पास जमीनी स्तर पर उस तरह का समर्थन मौजूद नहीं था।

    समन्वय में मदद । यूपी के मुकाबले असम में कांग्रेस बहुत बेहतर स्थिति में है। स्क्रीनिंग कमिटी का काम होता है उम्मीदवारों के नामों का चयन करना। हालांकि प्रियंका की भूमिका इससे ज्यादा की हो सकती है। असम में भी पार्टी गठबंधन में उतरेगी। बिहार में जिस तरह की गड़बड़ी हुई, नेतृत्व नहीं चाहेगा कि वैसा असम में हो। प्रियंका जैसे कद का नेता होने से असंतोष कम करने और समन्वय बैठाने में मदद मिलेगी। प्रियंका कई मौकों पर साबित कर चुकी हैं कि वह कुशल वक्ता हैं। वंदे मातरम् पर संसद में बहस के दौरान उन्होंने जिस तरह से कांग्रेस का रुख रखा था, उसकी पार्टी के अंदर और बाहर वाहवाही हुई थी। अब पार्टी असम में भी उनसे ऐसे ही कमाल की आशा कर रही है।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।