क्या थी यह याचिका, जिस पर सीजेआई ने की यह टिप्पणी
लाइवलॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका में संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए ऐसी गाइडलाइन जारी करने की अपील की गई थी, जो संविधान के खिलाफ बयान देते रहे हों। दरअसल, याचिका में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के हालिया बयानों का हवाला दिया गया था। साथ ही असम बीजेपी के जारी विवादित वीडियो का भी हवाला दिया गया था, जिसमें एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया गया था।
सिब्बल बोले-लॉर्डशिप कुछ कीजिए तो सीजेआई ने सुना दिया
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने कहा-हमें कुछ करने की जरूरत है। केवल हमारे लॉर्डशिप ही कुछ कर सकते हैं। यह बेहद जहरीला होता जा रहा है। यह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है।
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- निश्चित रूप से यह याचिका एक व्यक्ति विशेष (सरमा) के खिलाफ है। इसमें केवल उन्हीं के बयानों का हवाला दिया गया है।
सिब्बल के दबाव डालने पर कहा-नई याचिका लेकर आइए
जब कपिल सिब्बल बार-बार यह दबाव डालने लगे कि कोर्ट को कुछ करना चाहिए तो सीजेआई सूर्यकांत बोले-आप ऐसा कीजिए कि याचिका वापस ले लीजिए और एक नई याचिका लेकर आएं, जो संवैधानिक सिद्धांतों पर ही फोकस हो। याचिकाकर्ता ऐसा न दिखाएं कि वे किसी पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ हैं।
यह मंजूर नहीं, आप सभी को फेयर होना चाहिए
जब सिब्बल ने कहा कि यह किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है तो सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-याचिकाकर्ताओं ने कुछ लोगों को अपनी सहूलियत के अनुसार चुना और दूसरों को नजरअंदाज किया है। यह मंजूर नहीं होगा। आप सभी को फेयर होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा-किसी की सोच को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं
जब सिब्बल ने कहा-सिद्धांत हर पार्टी पर लागू होता है तो जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को इस देश में आखिरकार भाईचारे को ही बढ़ावा देना चाहिए। सीजेआई ने कहा-यह मामला गंभीर है और याचिका बेहद सामान्य तरीके से तैयार की गई है।
जस्टिस नागरत्ना ने भी कहा-अगर गाइडलाइंस दे भी दी गइई तो क्या सभी इसे मानेंगे? उन्होंने कहा-बयानों से पहले सोच आती है और सोच को हम कैसे कंट्रोल कर सकते हैं। आखिरकार सिब्बल के जोर देने पर पीठ ने इस मामले को दो हफ्ते के लिए टाल दिया। सिब्बल ने कहा-नई याचिका दायर करेंगे।













