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  • आत्मनिर्रता की दिशा में भारत की लंबी छलांग, स्वदेशी जहाज ‘समुद्र प्रताप’का कमीशन करेंगे रक्षा मंत्री

    नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक बल के लिए सोमवार का दिन बेहद ही खास होने वाला है। दरअसल, 5 जनवरी 2026 को पहला स्वदेशी रूप से बना प्रदूषण नियंत्रण पोत समुद्र प्रताप गोवा के गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों पानी में उतरेगा। रक्षा मंत्री द्वारा किया जाएगा कमीशन भारतीय तटरक्षक बल


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    By Azad Hind Desk जनवरी 4, 2026
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    नई दिल्ली: भारतीय तटरक्षक बल के लिए सोमवार का दिन बेहद ही खास होने वाला है। दरअसल, 5 जनवरी 2026 को पहला स्वदेशी रूप से बना प्रदूषण नियंत्रण पोत समुद्र प्रताप गोवा के गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों पानी में उतरेगा।

    रक्षा मंत्री द्वारा किया जाएगा कमीशन

    भारतीय तटरक्षक बल ने जानकारी देते हुए लिखा कि दो प्रदूषण नियंत्रण जहाजों में से पहला समुद्र प्रताप, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 5 जनवरी को गोवा शिपयार्ड में कमीशन किया जाएगा। आपको बता दें कि गोवा शिपयार्ड द्वारा बनाया गया ये जहाज 60 प्रतिशत से ज्यादा स्वादेशी सामग्री के साथ बना है।

    4,200 टन का स्वदेशी जहाज

    साथ ही 114.5 मीटर और 4,200 टन के इस जहाज की गति 22 समुद्री मील से अधिक है और इसकी सहनशक्ति 6,000 समुद्री मील है। जो इंडियन कोस्ट गार्ड की प्रदूषण प्रतिक्रिया, अग्निशमन और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगी।

    भारत की यात्रा में मिल का पत्थर

    आत्मनिर्भरता की दिशा में ये जहाज भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होगा। मुद्र प्रताप के कमीशन होने से समुद्री प्रदूषण की घटनाओं से निपटने, भारत के समुद्री पर्यावरण और संसाधनों की रक्षा करने में ICG की क्षमताओं में वृद्धि होगी।

    रक्षा क्षेत्र का प्रमुख उपक्रम GSL

    आपको बता दें कि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, सार्वजनिक रक्षा क्षेत्र का प्रमुख उपक्रम है। 22 जून, 2021 को हस्ताक्षरित 583 करोड़ रुपये के समझौते के तहत ICG के लिए ऐसे दो प्रदूषण नियंत्रण जहाजों का निर्माण कर रहा था। यह परियोजना पहली बार है जब इस श्रेणी के प्रदूषण-नियंत्रण जहाजों को भारत में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है।

    जहाज पर होंगे इतने अधिकारी और नाविक

    समुद्र प्रताप को कोस्ट गार्ड की खास ऑपरेशनल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इन-हाउस डिजाइन और बनाया गया है। यह जहाज 114.5 मीटर लंबा और 16.5 मीटर चौड़ा है और इसमें 14 अधिकारी और 115 नाविक होंगे। खास बात यह है कि यह भारत का पहला स्वदेशी डिजाइन और निर्मित हाइब्रिड, समुद्र में चलने वाला प्रदूषण-नियंत्रण जहाज भी है।

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