आंखों में आंखें डालकर व्यावहारिक संबंध
पवन खेड़ा ने कहा कि वह भारत कहाँ है जो निक्सन, जॉर्ज बुश और ओबामा की आँखों में आँखें डालकर व्यावहारिक संबंध बनाता था? आज ऐसा क्यों लगता है कि भारत के आम लोगों के हितों को नरेंद्र मोदी और उनके दो दोस्तों, अंबानी और अडानी के हितों के आगे नजरअंदाज किया जा रहा है? यह अमेरिका के साथ कोई समझौता नहीं है, बल्कि हमारे आत्म-सम्मान के साथ समझौता है।
उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क का जश्न मनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की भी आलोचना की। खेड़ा ने आगे कहा कि जो लोग इसे जश्न मनाने की वजह बता रहे हैं – नरेंद्र मोदी, उनके विदेश मंत्री और पीयूष गोयल खुद जानते हैं कि असल में क्या हुआ है। यह कोई डील नहीं, बल्कि सरेंडर है।
देश के आत्मसम्मान को रखा गिरवी
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता के गलियारों में बहस को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश की जा रही है। खेड़ा ने दावा किया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को संसद में इस मामले पर बोलने से बार-बार रोका गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का खुली बहस से इनकार इस डर से है कि डील की ‘सरेंडर’ शर्तें जनता के सामने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने कुछ अनजान शर्तों के तहत भारत के आत्म-सम्मान को वॉशिंगटन के पास ‘गिरवी’ रख दिया है।
खेड़ा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में बोलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। यह डर इसलिए है क्योंकि नरेंद्र मोदी जानते हैं कि नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष को पता है कि उन्होंने किन शर्तों पर सरेंडर किया और उन्हें क्या डर है कि उन्होंने सब कुछ अमेरिका के पास गिरवी रख दिया।













