आपको बता दें कि वैसे तो गुयाना की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है, लेकिन देश में भारतीय मूल के लोगों की भरमार है। ये सभी गिरमिटिया परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जिन्हें आज से करीब 200 साल पहले अंग्रेज कैरेबियाई और दक्षिण अमेरिकी देशों में लेकर गये थे। उस तरह के कुछ देशों में हिंदी के साथ साथ आज भी भोजपूरी भाषा बोली जाती है और भारतीय संस्कृति का प्रभाव आज भी मौजूद है। ये ताजा वाकया उस वक्त हुआ जब देश के कृषि राज्य मंत्री विकास रामकिसून संसद में बोल रहे थे।
विकास रामकिसून ने क्यों किया हिंदी में चैलेंज?
सोशल मीडिया वायरल ये वीडियो फरवरी महीने का ही है। देश की संसद में बजट सत्र पर बहस चल रही थी और इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहसबाजी की जा रही थी, जैसा आम तौर पर संसदों में होता है। इसी दौरान हिंदी बोलने का मुद्दा उठ गया। विपक्षी पार्टी के कुछ सांसदों ने कृषि राज्य मंत्री विकाश रामकिसून की क्षमताओं पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वो दावा कर रहे थे कि मंत्री विकास को अब अपनी संस्कृति या हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं है। जिसके बाद विकास ने संसद के सामने विपक्षी सांसद को हिंदी में चैलेज करना शुरू कर दिया।
विकास ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा कि “माननीय सांसद विष्णु पांडे, आपको अभी, इसी वक्त मैं आपको चुनौती देता हूं। कि किसी भी स्तर पर, किसी भी जगह पर जाकर, विषय वो तय करें और जिस विषय पर वो बहस करना चाहते हैं, हम उनसे बहस करेंगे। बिना कोई कागज देखे हुए।” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि “ईश्वर की नजर में हम सब एक हैं” और वे इसी परंपरा का पालन करते हैं। उन्होंने विपक्ष पर नस्लवाद और विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।
गुयाना के मंत्री की धाराप्रवाह हिंदी ने भारतीयों का ध्यान तेजी से खींचा है। भारत में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुयाना की संसद के विशेष सत्र को संबोधित किया था। वह गुयाना की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। भारत और गुयाना के बीच गहरे संसदीय संबंध हैं। मई 2025 में कांग्रेस के सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में एक भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने गुयाना का दौरा किया था और वहां के नेशनल असेंबली के स्पीकर मंजूर नादिर से मुलाकात की थी।













