भारत के ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान वायुसेना काफी बेबस नजर आई थी। भारत ने जब पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे, पाकिस्तान वायुसेना उसे रोकने में नाकाम रही थी। पाकिस्तान के एयर डिफेंस भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहे थे। वहीं, 10 मई को जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए, उस वक्त भी पाकिस्तानी वायुसेना असहाय थी। युद्ध की पहली रात को छोड़ दें तो 7 मई के बाद पाकिस्तान एयरफोर्स का एक भी लड़ाकू विमान उड़ान नहीं भर पाया था।
भारत से क्या अगले युद्ध की तैयारी कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान वायुसेना अब नये सिरे से तैयारियां कर रही हैं। पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के मुताबिक, यह युद्धाभ्यास टू-फोर्स कंस्ट्रक्ट पर की गई थी, जिसमें AI-इनेबल्ड, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन पर फोकस किया गया था। इसके साथ ही बदलते रीजनल सिक्योरिटी डायनामिक्स के हिसाब से स्वदेशी स्मार्ट टेक्नोलॉजी को भी इंटीग्रेट किया गया था। ISPR के बयान में आगे कहा गया है कि “काइनेटिक फेज में फर्स्ट-शूट, फर्स्ट-किल स्विंग-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट शामिल थे, जो लंबी दूरी की BVR एयर-टू-एयर मिसाइलों, एक्सटेंडेड-रेंज स्टैंड-ऑफ हथियारों और सटीक स्ट्राइक क्षमताओं से लैस थे, जिन्हें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म और एयर-टू-एयर रिफ्यूलर का सपोर्ट मिला।”
आपको बता दें कि पाकिस्तान के कई डिफेंस एक्सपर्ट लगातार सलाह दे रहे हैं कि पाकिस्तान के एयर डिफेंस में उतनी क्षमता नहीं है कि वो भारतीय मिसाइलों को रोक सके। भारतीय मिसाइलों के सामने चीन के एयर डिफेंस सिस्टम भी नाकाम हुए हैं, इसीलिए पाकिस्तान को ड्रोन वॉरफेयर पर फोकस करना चाहिए। पाकिस्तान वायुसेना ने पिछले कुछ महीनों में अपने ड्रोन जखीरे को तेजी से बढ़ाया है और इस युद्धभ्यास में भी ड्रोन को शामिल किया गया था।













