खेलो इंडिया मिशन का प्रस्ताव
खेलो इंडिया कार्यक्रम 2017 में शुरू किया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिभा पहचान के लिए सभी आयु वर्ग में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन करना था। सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान कहा, ‘खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरी के अनेक अवसर प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम से खेल प्रतिभाओं को निखारने की पहल को आगे बढ़ाते हुए, मैं अगले दशक में खेल क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव करने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।’
खेल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
उन्होंने कहा, ‘यह मिशन मूलभूत, मध्यवर्ती और विशिष्ट स्तरों के प्रशिक्षण केंद्रों के सहयोग से एकीकृत प्रतिभा विकास, प्रशिक्षकों और सहायक स्टाफ का व्यवस्थित विकास, खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और मंच प्रदान करने के लिए प्रतियोगिताएं और लीग का आयोजन तथा प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के लिए खेल संरचना के विकास को सुगम बनाएगा।’
खेलों को दिया जाएगा और ज्यादा बढ़ावा
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती खेल सामानों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है। उन्होंने कहा, ‘मैंने खेल सामान के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव रखा है जिससे उपकरण डिजाइन के साथ-साथ सामग्री विज्ञान में विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।’ खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद के नेतृत्व में एक कार्य बल का गठन किया है जिसने हाल ही में उच्च गुणवत्ता वाले कोच का एक समूह तैयार करने की वकालत की थी।
इसमें कोच के लिए लक्ष्य ओलंपिक पोडियम कार्यक्रम जैसी योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें भी उसी तरह की वित्तीय सहायता मिले जैसी शीर्ष खिलाड़ियों को मिल रही है, ताकि भविष्य में भारत की पदक जीतने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा और वह 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में भी शामिल है।













