भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने एक इंटरव्यू में कहा है कि इजरायल भारत के साथ अपने द्विपक्षीय रक्षा समझौते को बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि अपनी टेक्नोलॉजी शेयर की जा सके और भारत में मिलिट्री हार्डवेयर बनाया जा सके। साथ ही लेटेस्ट आयरन डोम और दूसरे डिफेंस सिस्टम में भी सहयोग बढ़ाया जा सके। पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर रेवाच ने कहा, ‘हम बहुत उत्साहित हैं कि प्रधानमंत्री मोदी इस हफ्ते इजरायल जा रहे हैं। इजरायल और भारत के बीच खास संबंधों को समझना जरूरी है और हम आज भारत को एक ग्लोबल सुपरपावर के तौर पर देखते हैं। इजरायल के इस दौरे के बारे में एक कैबिनेट प्रस्ताव भी है और यह कुछ पहलुओं, राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा प्रस्तावों पर ध्यान देगा।’
इजरायल बना रहा है नया गठबंधन
महावाणिज्यदूत ने कहा, ‘हम इस इलाके की संवेदनशीलता को समझते हैं, और यही एक वजह है कि हम भारत और अब्राहम अकॉर्ड्स के देशों और कुछ अफ्रीकी देशों के साथ, और मिडिल ईस्ट के देशों, जिनमें साइप्रस और ग्रीस भी शामिल हैं, के साथ मिलकर एक अलग एक्सिस बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि रेडिकल एक्सिस से निपटा जा सके। यह बहुत जरूरी है कि प्रधानमंत्री मोदी इस हफ्ते इजरायल जाएं और इस पहल को बढ़ावा देने की कोशिश करें।’
‘रेडिकल शिया सुन्नी बड़ी चुनौती’
दोनों देशों के बीच डिफेंस डील को लेकर उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के बीच लगातार रक्षा सहयोग बढ़ रहा है, जो बहुत अनोखा और मजबूत है, जो हम दोनों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि हम दोनों ही आपसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस खास दौरे के दौरान, हम इस समझौते को बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं ताकि खास मुद्दों पर फोकस किया जा सके, जैसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा सहयोग और इजरायल में आयरन डोम और दूसरे डिफेंस सिस्टम के बारे में सहयोग ताकि हम असल में भारत में अपने पार्टनर के साथ टेक्नोलॉजी शेयर कर सकें।’
रक्षा समझौते पर मुख्य फोकस को लेकर उन्होंने कहा, ‘डिफेंस एक अहम मुद्दा है। मैं यह नहीं कहना चाहता कि इस दौरे में डिफेंस ही एकमात्र जरूरी मुद्दा है जिस पर बात होगी। हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारी वैल्यूज एक जैसी हैं और बदकिस्मती से, हमारे पास एक जैसी चुनौतियां भी हैं। तो जैसा कि पीएम नेतन्याहू ने इस हफ्ते कहा, सबसे पहले, हमारे पास रेडिकल एक्सिस, शिया संगठनों के मुस्लिम रेडिकल एक्सिस के खिलाफ एक चुनौती है। हमारे पास रेडिकल सुन्नी एक्सिस भी है। अब डिफेंस के मुद्दों पर फोकस करना जरूरी है, लेकिन आर्थिक और राजनीतिक सहयोग पर भी फोकस करना जरूरी है। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में परमानेंट सीट के लिए भारत की जरूरतों को भी समझते हैं।’
आयरन डोम सिस्टम कितना ताकतवर ?
इजरायल का आयरन डोम एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे इजरायल की कंपनी Rafael एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर बनाया है। यह सिस्टम कम दूरी के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को मार गिराने के लिए बनाया गया है ताकि आबादी वाले को हमले से बचाया जा सके। इजरायल का दावा है कि इसकी सफलता की दर 90 फीसदी है। यह रडार का इस्तेमाल अपने दुश्मनों की पहचान के लिए करता है। इसके बाद वह खतरे को वास्तविक पाने के बाद तमीर इंटरसेप्टर मिसाइलों को लांच करता है।
आयरन डोम की कीमत क्या है?
आयरन डोम की प्रत्येक बैट्री में एक रडार, एक बैटल मैनेजमेंट कंट्रोल सेंटर और एक लॉंचर होता है जिसमें कम से कम 20 तमीर इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं। यह हर हमलावर की पहचान करता है और अगर वह गैर आबादी वाले इलाके में जा रहा होत है तो उसे छोड़ देता है। यह कम ऊंचाई के तोप के गोले, मोर्टार और रॉकेट के खिलाफ बहुत कारगर है। इजरायल अब तक गाजा और लेबनान से आने वाले हजारों रॉकेट को मार गिरा चुका है। इसके और ज्यादा आधुनिक वर्जन को बनाने में जुटा हुआ है ताकि बड़े पैमाने पर आने वाले ड्रोन को मार गिराया जा सके। आयरन डोम प्रभावी तो है लेकिन यह काफी महंगा है। एक तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत 40 से 50 हजार डॉलर होती है। वहीं आयरन डोम की एक बैट्री की कीमत 10 करोड़ डॉलर तक होती है। ऐसे में भारत को सोच समझकर इसे लेना चाहिए। भारत को सस्ते विकल्प जैसे आयरन बीम पर भी फोकस करना चाहिए जो एक लेजर वेपन है।













