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  • आर्मी अफसर रिटायरमेंट के बाद 20 साल तक नहीं लिख सकते किताब? जानें नरवणे बुक विवाद के बीच क्या बोले रक्षा मंत्री

    नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब के विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि रिटायर आर्मी अफसरों के किताब लिखने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने उन सभी अटकलों को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि सेना से जुड़े


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    By Azad Hind Desk फरवरी 22, 2026
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    नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब के विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि रिटायर आर्मी अफसरों के किताब लिखने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने उन सभी अटकलों को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि सेना से जुड़े अधिकारियों को रिटायरमेंट के 20 साल बाद तक कोई किताब लिखने की अनुमति नहीं होती है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को इस बात से इनकार किया कि सीनियर मिलिट्री अधिकारियों पर रिटायरमेंट के बाद अपने संस्मरण या किताबें पब्लिश करने से पहले 20 साल का जरूरी कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू करने का कोई प्रपोजल चल रहा है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार अगले 4-6 महीनों में फ्रांस के साथ राफेल डील पक्की करने की पूरी कोशिश करेगी।

    ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड का कोई प्रस्ताव नहीं आया’

    पत्रकारों के साथ बातचीत में रक्षा मंत्री ने कूलिंग-ऑफ पीरियड के प्रपोजल के बारे में मीडिया की अटकलों को खारिज करते हुए कहा, ‘कैबिनेट के सामने ऐसा कोई प्रपोजल चर्चा के लिए नहीं आया’। उनका यह बयान उस विवाद के बाद अहम है जो पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की चीन के साथ लद्दाख स्टैंडऑफ पर अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर शुरू हुआ था। इस विवाद के चलते लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और BJP सांसदों के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला था।

    जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब में क्या लिखा?

    • किताब में एक डिटेल लेख छापा गया है। जिसमें लिखा कि भारतीय सेना की उत्तरी कमान के तत्कालीन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश जोशी को 31 अगस्त 2020 की रात 8:15 बजे एक फोन कॉल आया। चार चीनी टैंक, पैदल सैनिकों के साथ पूर्वी लद्दाख के रेचिन ला की ओर ऊपर बढ़ रहे थे। ये टैंक कैलाश रेंज पर भारतीय सेना की पोस्ट से कुछ सौ मीटर की दूरी पर थे।
    • लेख में किताब का हवाला देते हुए लिखा है कि इसके बाद जनरल नरवणे ने देश के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को लगातार फोन करना शुरू किया। वे सबसे बस यही पूछ रहे थे कि मेरे लिए क्या ऑर्डर हैं।
    • इसमें लिखा है कि उनके वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई साफ निर्देश नहीं मिला। चीनी टैंक रुके नहीं थे। वे चोटी से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर रह गए थे।
    • इसमें कहा गया है कि किताब में नरवणे ने लिखा है कि मेरी स्थिति बेहद नाज़ुक हो चुकी थी। इसके मुताबिक रात 10:30 बजे रक्षा मंत्री का फोन आया। टॉप लीडरशिप से निर्देश सिर्फ एक पंक्ति का था – ‘जो उचित समझो, वो करो।’
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